
सचिव, उपसरपंच और पंचों पर वित्तीय अनियमितता के आरोप; कलेक्टर, CEO और SP से कार्रवाई की मांग
जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सन्ना इन दिनों गंभीर विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों के केंद्र में है। पंचायत के निर्वाचित सरपंच अरविंद कुजूर ने पंचायत सचिव गणेश यादव, उपसरपंच एवं कुछ वार्ड पंचों पर वित्तीय अनियमितता, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने तथा पंचायत निधि के दुरुपयोग की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर सरपंच ने जिला पंचायत CEO, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पंचायत निधि और कैश बुक को लेकर उठे सवाल👇
सरपंच द्वारा प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत के स्वयं के संसाधनों से प्राप्त आय को सचिव द्वारा नियमानुसार बैंक खाते में जमा नहीं कराया गया। साथ ही पंचायत की कैश बुक और वित्तीय रजिस्टरों का नियमित संधारण भी नहीं किया गया। सरपंच का कहना है कि वित्तीय अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई है, जिससे पंचायत की राशि के दुरुपयोग और गबन की आशंका पैदा हो गई है।शिकायत के अनुसार पंचायत सचिव पिछले कई महीनों से कैश बुक, लेखा रजिस्टर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं करा रहे हैं, जबकि पंचायत राज अधिनियम के तहत यह अनिवार्य प्रक्रिया है।
चेकों पर जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप👇
मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सरपंच ने आरोप लगाया है कि सचिव और कुछ पंच निर्माण सामग्री की राशि से संबंधित चेकों पर अपने या अपने रिश्तेदारों के नाम से हस्ताक्षर कराने का दबाव बना रहे थे।शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में दबाव बनाकर कुछ चेक विभिन्न व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों के नाम पर जारी कराए गए। सरपंच का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया पंचायत के वित्तीय नियमों और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

निविदा प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप👇
ग्राम पंचायत में निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए सीलबंद निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। आरोप है कि 15 जून 2026 को आयोजित पंचायत बैठक में सबसे कम दर (लोएस्ट रेट) देने वाले सप्लायर के कोटेशन को कथित रूप से निजी स्वार्थ के चलते निरस्त कर दिया गया।सरपंच का आरोप है कि इससे पंचायत को आर्थिक नुकसान पहुंचाने तथा अधिक दरों पर सामग्री खरीदने का रास्ता तैयार किया गया। इस संबंध में पंचायत कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज टिप्पणियों का भी हवाला दिया गया है।
हाट-बाजार और बस स्टैंड की भूमि पर कब्जे का आरोप👇
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पंचायत को सामुदायिक वन अधिकार पट्टा के तहत प्राप्त सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा किया गया है। सरपंच का आरोप है कि पंचायत के एक निर्वाचित पंच ने सचिव की मिलीभगत से दो मंजिला भवन का निर्माण करा लिया है।यह भूमि ग्रामवासियों के उपयोग के लिए प्रस्तावित हाट-बाजार और बस स्टैंड क्षेत्र का हिस्सा बताई जा रही है। सरपंच ने इसे जनहित के विरुद्ध बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
शासकीय तालाब की भूमि पर निर्माण का आरोप👇
मामले में उपसरपंच पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार गांव के शासकीय तालाब क्षेत्र की भूमि पर कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। सरपंच का कहना है कि जल संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं की भावना के विपरीत यह कदम उठाया गया है।उन्होंने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
तीन महीने से ठप पड़े विकास कार्य , विवाद का असर पंचायत के विकास कार्यों पर भी दिखाई दे रहा है। सरपंच अरविंद कुजूर ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि पंचायत में स्वीकृत लाखों रुपये के विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।उनके अनुसार 15वें वित्त आयोग और अन्य मदों से कई निर्माण कार्यों को तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन सचिव और कुछ पंचों के सहयोग नहीं करने के कारण कार्य धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं।
करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों के विकास कार्य अटके
पंचायत अभिलेखों के अनुसार जिन प्रमुख कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है, उनमें शामिल हैं—खूंटाटांगर में आरसीसी पुलिया निर्माणगाडाकोना-धवईपानी मार्ग पर पुलिया निर्माण,चंदाडीपा-खड़कोना मार्ग पर पुलिया निर्माण,पंचायत भवन का जीर्णोद्धार,विभिन्न वार्डों में तालाब गहरीकरण,सीसी रोड निर्माण,पेयजल व्यवस्था संबंधी कार्य,नहानी घर निर्माण,नाली सफाई एवं मिट्टी खुदाई कार्यइन कार्यों पर लाखों रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद अधिकांश योजनाएं प्रारंभ नहीं हो सकी हैं।
उच्च अधिकारियों तक पहुंचा मामला
सरपंच द्वारा भेजे गए शिकायत पत्रों की प्रतिलिपियां अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बगीचा, जिला पंचायत CEO, कलेक्टर जशपुर तथा सरगुजा संभाग के आयुक्त को भी भेजी गई हैं। दस्तावेजों के अनुसार शिकायतें संबंधित कार्यालयों में आधिकारिक रूप से दर्ज भी हो चुकी हैं।
निष्पक्ष जांच और FIR की मांग
सरपंच ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पंचायत सचिव को तत्काल सन्ना पंचायत के प्रभार से हटाया जाए। साथ ही वित्तीय अनियमितताओं, कथित अवैध कब्जों और अन्य आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।पुलिस अधीक्षक को भेजे गए आवेदन में आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की भी मांग की गई है।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
सन्ना ग्राम पंचायत का यह विवाद अब स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है। एक ओर सरपंच लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और पंचायत विभाग की जांच पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता, शासकीय भूमि संरक्षण और स्थानीय स्वशासन की जवाबदेही से जुड़ा एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।



