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धमतरी में धर्मांतरण को लेकर हिंदू संगठन और भीम आर्मी आमने-सामने, 5 घंटे चला विरोध

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धर्मांतरण को लेकर हिंदू संगठन और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ है। रविवार को नेशनल हाईवे के पास टिकरापारा स्थित घर में प्रार्थना सभा चल रही थी। हिंदू संगठन ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए सभा का विरोध किया और नारेबाजी की। कुछ देर बाद भीम आर्मी के लोग भी मौके पर पहुंच गए। उनका कहना था कि कोई भी व्यक्ति मंदिर, मस्जिद या चर्च कहीं भी जा सकता है। इसके लिए धर्म परिवर्तन करने या किसी के परमिशन की जरूरत नहीं है। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

मामला नेशनल हाईवे के पास टिकरापारा स्थित घर का है। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम और महापौर मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग कर शांत कराया गया।

दरअसल, धमतरी के टिकरापारा इलाके में नेशनल हाईवे के पास रविवार को एक घर में प्रार्थना सभा हो रही थी, जहां करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। इसकी जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता घर के बाहर पहुंच गए और विरोध करने लगे। कार्यकर्ता काफी देर तक नारेबाजी करते हुए सभा बंद करने की मांग की और वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। आसपास के लोगों को पता चला तो धीरे-धीरे भीड़ जुटने लगी। कुछ देर बाद भीम आर्मी के लोग भी मौके पर पहुंच गए।

इसके बाद हिंदू संगठन और भीम आर्मी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि उनके बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया। हिंदू संगठन का विरोध करीब 5 घंटे तक चला।

हिंदू जागरण मंच के दीपक ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रशासन की मौजूदगी में शांति समिति की बैठक हुई थी। इसमें क्रिश्चियन फोरम और हिंदू संगठनों के बीच प्रार्थना सभाओं को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई थी। बैठक में तय हुआ था कि प्रार्थना सभा में केवल ईसाई समुदाय के लोग ही शामिल होंगे। अगर किसी दूसरे धर्म का व्यक्ति सभा में शामिल होना चाहता है तो उसे पहले बपतिस्मा लेकर ईसाई धर्म अपनाना होगा। दीपक ठाकुर का आरोप है कि रविवार को हुई प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में गैर-ईसाई लोग शामिल हुए। इनमें ऐसे लोग भी थे जो धर्म से ईसाई हैं और खुद को हिंदू बताते हैं और सरकारी सुविधाओं और आरक्षण का लाभ लेते हैं, लेकिन साथ ही ईसाई धर्म की प्रार्थना सभा में शामिल हो रहे हैं।

क्रिश्चियन फोरम के जिला जनरल सेक्रेटरी डॉ. डायमंड फिलस ने हिंदू संगठन के आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि प्रार्थना सभा स्थलों पर जो सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, वे ईसाई समुदाय के लिए हैं। डायमंड फिलस ने कहा कि लगातार विरोध और रोक-टोक से विवाद बढ़ता है और ऐसी स्थिति में प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। क्रिश्चियन फोरम पहले भी धर्मांतरण के आरोपों से इनकार कर चुका है।

विवाद के बीच भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष मिलाप साहू भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का अधिकार देता है। भीम आर्मी ने कहा कि जहां भी किसी व्यक्ति के मौलिक या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, संगठन वहां आवाज उठाएगा। इससे पहले भी भीम आर्मी ने प्रार्थना सभा में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था।

मौके पर पहुंचे महापौर रामू रोहरा ने कहा कि मामला चिंता का विषय है। जानकारी मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि शहर की शांति और कानून-व्यवस्था सबसे जरूरी है।

धमतरी SDM पीयूष तिवारी ने कहा कि हिंदू संगठन ने प्रार्थना सभा का विरोध किया था। भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे थे। विवाद की स्थिति बनी, तो पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।

इससे जुड़ी खबर के अनुसार, छत्तीसगढ़ में नए धर्म स्वतंत्रता विधेयक को राज्यपाल रमेन डेका ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब राज्य में इसी नए कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। धर्मांतरण कराने पर उम्रकैद और मददगारों को भी जेल का प्रावधान है।

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