रायपुर। बेटी की मौत का दुख लेकर रायपुर पहुंचे मां-पिता के सामने बेबसी खड़ी थी, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। बेटी खिलेश्वरी साहू और उसके दो बच्चों की हत्या हो चुकी थी। मां की आंखों के सामने बेटी और नातियों के शव थे, पिता के सामने उनकी अंतिम विदाई का सवाल। वे बेटी और नातियों को अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन वहां भी उन्हें जगह नहीं मिली।
गांव और समाज के लोगों ने शव लेने से इन्कार कर दिया। कारण बताया गया कि खिलेश्वरी ने साहू समाज छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। जिस बेटी को जन्म देकर मां ने पाला और जिस बेटी के सुख के लिए पिता ने जीवन बिताया, उसी की मौत के बाद पिता को उसके अंतिम संस्कार के लिए भी मदद मांगनी पड़ी।
ओंकार साहू ने मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान को एक हस्तलिखित पत्र लिखकर बेटी और दोनों नातियों के कफन-दफन की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई। पत्र की एक पंक्ति पिता की बेबसी बयां करती है ‘मैं लड़की का पिता गांव व समाज में असमर्थ हूं।’
शनिवार देर रात डूमरतराई में भुवनेश्वर साहू ने पत्नी खिलेश्वरी और दोनों बच्चों पर चाकू से हमला कर दिया। तीनों की मौत हो गई। घटना की खबर मिलने के बाद खिलेश्वरी के माता-पिता और परिवार के कई सदस्य रायपुर पहुंचे। मां के सामने बेटी थी और उसके पास ही दोनों नातियों के शव। जिस घर में कभी बच्चों की आवाज गूंजती होगी, वहां अब तीन अर्थियां उठाने की तैयारी थी।
मां-पिता के दुख पर उस समय एक और बोझ आ गया, जब गांव से अंतिम संस्कार के लिए भी सहारा नहीं मिला। आखिरकार मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान ने जिम्मेदारी संभाली। परिजनों की मौजूदगी में रायपुर के जोरा स्थित मुक्तिधाम में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें धर्म परिवर्तन के बाद परिजन या समाज के लोग शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर देते हैं। ऐसी स्थिति में संस्था मृतकों का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक कराने के लिए आगे आती है।
– जमीर अली, संचालक, मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान



