
बस्तर की पहचान सिर्फ घने जंगलों और प्राकृतिक खूबसूरती से नहीं, बल्कि यहां की सादगी, संस्कृति और मेहमान नवाजी से भी है। धुड़मारास का धुरवा डेरा होम स्टे इसी अनुभव को पर्यटकों तक पहुंचा रहा है। वर्ष 2022 में दो कमरों से शुरू हुआ यह छोटा-सा प्रयास अब ‘बेस्ट होमस्टे’ के सम्मान तक पहुंच गया है।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर धुरवा डेरा को छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग एवं पर्यटन मंडल की ओर से 27 सितंबर को रायपुर में सम्मानित किया गया। यह सम्मान पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़ शासन राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ एस भारतीदासन और पर्यटन मंडल के प्रबंध निदेशक सौमिल रंजन चौबे ने प्रदान किया।
गौरतलब है कि इस अवार्ड के मिलने से पहले विश्व पर्यटन दिवस से पहले 23 सितंबर को पर्यटन बोर्ड के सचिव सहित अधिकारियों की टीम धुड़मारास पहुंची थी। टीम ने धुरवा डेरा में पर्यटकों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। इसके साथ आसपास के क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाएं भी देखीं।
धुरवा डेरा की शुरुआत वर्ष 2022 में सिर्फ दो कमरों से हुई थी। उस समय एक कमरे का किराया 1500 रुपए रखा गया था। धीरे-धीरे धुड़मारास आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी और होम स्टे की पहचान भी बनी। वर्तमान में यहां तीन कमरे उपलब्ध हैं और एक कमरे का किराया 2500 रुपए है।
धुरवा डेरा की खासियत है कि यहां आने वाले पर्यटकों को गांव के प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय जीवनशैली और बस्तर की संस्कृति के करीब रहने का अवसर मिलता है। यही अनुभव इसे पारंपरिक होटल से अलग पहचान देता है।
धुरवा डेरा से जुड़े और धुड़मारास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले मनीष बघेल ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनके लिए नहीं, बल्कि धुड़मारास के पूरे समुदाय के लिए गौरव का क्षण है। गांव की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक आतिथ्य और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े लोगों के प्रयासों को भी इससे पहचान मिली है। इस सम्मान को अपने सदस्यों और धुड़मारास के समुदाय को समर्पित किया है।
होम स्टे पर्यटकों को स्थानीय परिवार और समुदाय के बीच ठहरने का अनुभव देने पर आधारित है। होटल में जहां पर्यटक मुख्य रूप से कमरे और सुविधाओं तक सीमित रहता है, वहीं होम स्टे में उसे स्थानीय खान-पान, रहन-सहन, संस्कृति और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को करीब से जानने का अवसर मिलता है।
ग्रामीण पर्यटन के जरिए स्थानीय परिवारों के लिए आय के नए अवसर भी बनते हैं। धुड़मारास में धुरवा डेरा इसी सोच को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है। सम्मान सिर्फ एक होम स्टे का नहीं, बल्कि पूरे समुदाय का है, ऐसा धुरवा डेरा प्रमुख मनीष और डेरा परिवार ने कहा।



