राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) बलरामपुर के प्रभारी जिला प्रबंधक विद्यासागर गोपाल को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) अंबिकापुर की टीम ने मंगलवार को 22 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपित द्वारा परिवहन बिल पास करने के एवज में दो प्रतिशत कमीशन लिया जा रहा था। प्रभारी जिला प्रबंधक को न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। आरोपित का मूल पद सहायक प्रबंधक का है, लेकिन बलरामपुर में वह जिला प्रबंधक का कामकाज देख रहा था।
जानकारी के अनुसार अंबिकापुर के सत्तीपारा निवासी शिवराज सिंह नागरिक आपूर्ति निगम में खाद्यान्न परिवहन का कार्य करते हैं। उनकी फर्म नागरिक आपूर्ति निगम में पंजीकृत है। उन्होंने वाड्रफनगर क्षेत्र में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए द्वार प्रदाय परिवहन (डीपीटी) कार्य किया था, जिसका लगभग 11.39 लाख रुपये का भुगतान लंबित था।
आरोप है कि भुगतान जारी करने के एवज में प्रभारी जिला प्रबंधक विद्यासागर गोपाल द्वारा हर बिल पर दो प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी। इसी के तहत 11.39 लाख रुपये के भुगतान के लिए 22 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। रिश्वत से तंग आकर शिवराज सिंह ने एसीबी अंबिकापुर में शिकायत की।
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद 29 सितंबर 2026 को ट्रैप आयोजित किया गया। योजना के तहत आवेदक को 22 हजार रुपये लेकर बलरामपुर स्थित जिला कार्यालय भेजा गया। जैसे ही प्रभारी प्रबंधक ने रकम ली, पहले से मौजूद एसीबी टीम ने कार्यालय कक्ष में ही उसे रंगे हाथ धर दबोचा।
एंटी करप्शन ब्यूरो के निरीक्षक शरद सिंह के नेतृत्व में रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा सात के तहत कार्रवाई की गई। उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से जेल भेजने का आदेश जारी हुआ है।
बलरामपुर में गिरफ्तारी के बाद एसीबी रायपुर की एक टीम ने न्यू राजेंद्र नगर स्थित प्रभारी जिला प्रबंधक के घर पर भी छापा मारा है। स्थानीय स्तर की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपित ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। छापेमारी के दौरान और भी संपत्तियों का ब्यौरा सामने आने की संभावना है।
इधर परिवहनकर्ताओं ने बताया कि प्रभारी जिला प्रबंधक द्वारा हर भुगतान के बदले कमीशन का दर तक किया गया था। उस हिसाब से कमीशन नहीं देने पर परिवहन का भुगतान नहीं किया जाता था।



