बच्चे किताबों के सवाल हल करने के बजाय दुकानदार बनकर आते हैं और शुरू हो जाता है खरीद-बिक्री का खेल।
इस दौरान बच्चों की भूमिका किताबी सवालों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे दुकानदार बनकर सामने आते हैं।
बच्चों के दुकानदार बनने के साथ ही खरीद-बिक्री का खेल शुरू हो जाता है।
यह गतिविधि बच्चों को किताबों के सवालों से अलग हटकर व्यवहारिक रूप में शामिल होने का अवसर देती है।
बच्चे दुकानदार की भूमिका निभाते हुए खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
इस तरह बच्चों के बीच खरीद-बिक्री का खेल आयोजित होता है, जिसमें वे दुकानदार बनकर आते हैं।



