
राज्य में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 45 चिकित्सा अधिकारियों की दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में पोस्टिंग की है। डॉक्टरों की इस पोस्टिंग का मकसद गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि राज्य में मातृत्व मृत्यु दर में कमी आ सके।
मातृत्व मृत्यु दर के अनुपात में छत्तीसगढ़ अभी देश में तीसरे नंबर पर है। यहां एक लाख में मातृ मृत्यु दर 124 है। इसी स्थिति को सुधारने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने ऐसे ग्रामीण और दूरस्थ व पहुंचविहीन हेल्थ सेंटरों में डॉक्टरों की पोस्टिंग की है, जहां डाक्टर रहना नहीं चाहते हैं। पोस्टिंग करने पर ज्यादा दिन नहीं टिकते हैं।
इस वजह से ऐसे हेल्थ सेंटरों के लिए सैलरी का पैकेज बढ़ाया गया है। अस्पताल जितना दुर्गम और पहुंचविहीन जगह पर है, वहां डॉक्टर को उतना ही ज्यादा पैकेज दिया गया है। दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में जहां डॉक्टर के लिए रहना और नियमित सेवाएं देना मुश्किल है, वहां 1.01 लाख रुपए तक का पैकेज है। दरभा, कटेकल्याण और सुकमा जैसे क्षेत्रों में इसी श्रेणी के पैकेज दिए गए हैं।
इसके बाद कठिन लेकिन अपेक्षाकृत पहुंच वाले क्षेत्रों में पैकेज 70 से 84 हजार रुपए तक है। मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों में ज्यादातर डॉक्टरों को 58,100 रुपए का पैकेज दिया गया है।
पोस्टिंग के साथ ही इन डॉक्टरों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। इस सिस्टम के तहत भर्ती होने वाले डाक्टर कहीं भी निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। उन्हें जहां पोस्टिंग दी गई है वहीं रहना होगा। ऐसा नहीं होगा कि ड्यूटी के समय उस गांव या जगह में रहें और ड्यूटी के बाद शहरी क्षेत्र में आ जाएं। उन्हें 24 घंटे अस्पताल के आस-पास ही रहना पड़ेगा, ताकि इमरजेंसी में गांव या आस-पास के लोगों को जरूरत पड़ने पर डाक्टर वहां उपलब्ध रहें। बाहर से आने-जाने पर सेवा समाप्त की जा सकती है।
सभी डाक्टरों की नियुक्ति 31 मार्च 2027 तक के लिए की गई है। उनके परफार्मेंस के आधार पर उनकी सेवा अवधि बढ़ायी जा सकती है।
मातृ मृत्यु अनुपात में राज्यों की स्थिति इस प्रकार है। कम मातृ मृत्यु अनुपात वाले 10 राज्य: केरल–30, आंध्रप्रदेश–30, तमिलनाडु–35, महाराष्ट्र–36, गुजरात–51, झारखंड–54, तेलंगाना–59, कर्नाटक–68, राजस्थान–86, हरियाणा–89।
ज्यादा मातृ मृत्यु अनुपात वाले 10 राज्य: ओडिशा–153, छत्तीसगढ़–146, मध्यप्रदेश–142, उत्तरप्रदेश–141, असम–110, पश्चिम बंगाल–104, बिहार–104, उत्तराखंड–91, पंजाब–90, हरियाणा–89।
नोट: मातृ मृत्यु अनुपात यानी प्रति एक लाख में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा है।



