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दल से बिछड़े कबरा हाथी का आतंक: सूरजपुर-बलरामपुर में तीन दिन में दो और ग्रामीणों की मौत, अब तक नौ की जान गई

सूरजपुर और बलरामपुर जिले में दल से बिछड़ा हाथी लगातार जानमाल को नुकसान पहुंचा रहा है। रविवार की रात प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा में ग्रामीण को कुचल मार डालने के बाद बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र में घुसे इस हाथी ने बेटी के घर जा रहे एक और ग्रामीण को मंगलवार रात मार डाला। दरहोरा में मृत ग्रामीण का शव तीसरे दिन बरामद हुआ। अब तक इस हाथी द्वारा कुल नौ लोगों की जान लेने की बात सामने आई है। दल से अलग होने के कारण यह आक्रामक है और तेजी से मूवमेंट कर रहा है।

दल से बिछड़ा यह हाथी सूरजपुर और बलरामपुर जिले के सीमावर्ती हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कबरा के नाम से प्रचलित है। दरअसल इसके कान के पास सफेद और चितकबरा जैसा रंग दिखाई देता है। यह फसलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा रहा है। हाथी ने राजपुर वन परिक्षेत्र के दुप्पी, धंधापुर, रेवतपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में विचरण किया और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। जनहानि के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। हाथी की गतिविधियों पर वन विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम परसवारकला में दल से बिछड़े हाथी ने ग्रामीण को कुचल कर मार डाला। मृतक सुटरूंग कौशिक (53) बेटी के घर जा रहा था। उसी दौरान अचानक हाथी आ गया। इसके पहले की वह भाग पाता हाथी ने उसे उठाकर पटक दिया और पैरों से भी कुचला। ग्रामीण की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र से दल से बिछड़ा हाथी राजपुर वन परिक्षेत्र में घुसा है।

मंगलवार की शाम यह हाथी परसवारकला के आसपास विचरण कर रहा था। इस बात की जानकारी सम्भवतः ग्रामीणों को नहीं थी। शाम लगभग सात बजे ग्राम परसवारकला के बड़खापारा निवासी सुटरूंग कौशिक अपनी पुत्री के घर जाने के लिए निकला था। बेटी का घर महान नदी के दूसरी ओर है। महान नदी को पार कर वह बेटी के घर की ओर पैदल जा ही रहा था कि उसका सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी के हमले से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही हाथी निगरानी और ग्रामीणों को जागरूक करने में लगे वन कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। रात होने के कारण आवश्यक कार्रवाई बुधवार सुबह की गई। चिकित्सकों द्वारा मौके पर ही शव परीक्षण किया गया। मृतक की पत्नी कुलेश्वरी कौशिक को वन विभाग की ओर से तत्कालिक सहायता राशि के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए गए हैं। शेष पांच लाख 75 हजार रुपये की सहायता राशि नियमानुसार कार्रवाई पूर्ण होने के बाद प्रदान की जाएगी। घटना को लेकर वन अधिकारियों ने दावा किया है कि मृतक शराब के नशे में था।

राजपुर के उप वनमंडलाधिकारी रविशंकर श्रीवास्तव और वन परिक्षेत्र अधिकारी अजय वर्मा ने बताया कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग ने गज संकेत एप और स्थानीय वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से करीब दो हजार ग्रामीणों को जोड़ रखा है। मोबाइल के माध्यम से ग्रामीणों को हाथियों के आने-जाने तथा उनके वर्तमान विचरण क्षेत्र की जानकारी लगातार दी जाती है, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें। वन अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर मुनादी कराते हैं। गजराज वाहन के माध्यम से भी लोगों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी देकर सावधानी बरतने की समझाइश दी जाती है।

सरगुजा वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी डा प्रणव मिश्रा ने कहा कि हाथियों के प्रबंधन को लेकर वन मंडलाधिकारियों के प्रस्ताव के अनुरूप पहल की जाती है। यदि उनके स्तर से प्रस्ताव आता है तो हाथी को रेस्क्यू सेंटर में रखने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी से अनुमति लेनी होती है। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में प्रशिक्षित कुमकी हाथी भी हैं। जनहानि की घटना की समीक्षा वन मंडलाधिकारियों के स्तर पर की जाती है। जनहानि के कारण के साथ ही कौन सा हाथी शामिल था, इसकी समीक्षा होती है। यदि उनके स्तर से कोई भी प्रस्ताव आएगा तो हमारी ओर से हाथी के प्रबंधन के लिए पूरा सहयोग किया जाएगा।

सूरजपुर वन मंडल के वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में हाथी के हमले में एक और ग्रामीण की मौत का मामला सामने आया है। दरहोरा निवासी प्रमोद राजवाड़े (32), पिता कामेश्वर राजवाड़े, रविवार रात से लापता थे। बुधवार को उसका शव गांव के समीप धान के खेत में कीचड़ से लथपथ अवस्था में मिला। घटनास्थल पर मिले हाथी के पैरों के निशान व अन्य साक्ष्यों के आधार पर हाथी के हमले में मौत होने की पुष्टि हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार प्रमोद ने दरहोरा स्कूल के पास स्थित नदी में मछली पकड़ने के लिए जाल लगाया था। रविवार रात करीब 10 बजे वह जाल में मछली फंसी है या नहीं, यह देखने के लिए घर से निकला था। वह धान के खेत से होते हुए नदी की ओर जा रहा था। इसी दौरान उनका सामना कबरा हाथी से हो गया। हाथी ने प्रमोद को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद उसे सूंड में लपेटकर जमीन पर पटका और पैरों से कुचल दिया। इससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। देर रात तक घर नहीं लौटने पर स्वजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। तीन दिन बाद बुधवार को एक ग्रामीण ने धान के खेत में कीचड़ में लिपटा शव देखा। इसके बाद ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंची और मृतक की पहचान हुई। सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा।

उप वन मंडलाधिकारी संस्कृति बार्ले और वन परिक्षेत्र अधिकारी उत्तम मिश्रा ने घटनास्थल का जायजा लिया। वन विभाग ने शव का पोस्टमार्टम कराया। विभाग की ओर से मृतक के स्वजनों को तात्कालिक सहायता के रूप में 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है। प्रमोद अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गया है। वह परिवार का इकलौता सहारा था। क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात हाथी मित्र दल और वनकर्मी हाथियों की लोकेशन की जानकारी इंटरनेट मीडिया में साझा करने के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी मुनादी के माध्यम से लगातार देते रहते हैं। इसके बावजूद प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों के हमले से जनहानि और फसलों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में लगातार हो रही जनहानि को ध्यान में रखते हुए निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए वन विभाग में अब आधुनिक संसाधनों की जरूरत महसूस की जा रही है।

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