
बस्तर में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से हुई मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर 50 साल में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। नदी का पानी 12.39 मीटर तक पहुंच गया, जो 9 जुलाई 1973 को दर्ज 12.18 मीटर के पुराने रिकॉर्ड से 21 सेंटीमीटर ज्यादा है। जगदलपुर में बाढ़ से हुई तबाही की ड्रोन तस्वीरों में कई निचले इलाके पानी से घिरे नजर आ रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग की एडवाइजरी के बाद प्रशासन ने फिर अलर्ट जारी किया है। अपस्ट्रीम से पानी की आवक और जलाशयों से छोड़े जा रहे पानी के कारण आज (29 सितंबर) जगदलपुर में इंद्रावती का जलस्तर 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक और बढ़ सकता है।
इंद्रावती नदी का खतरे का स्तर 8.3 मीटर है। इसके मुकाबले नदी का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंचने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। बोड़ना और भेजापदर जैसे गांव पानी से घिर गए और सड़क संपर्क टूट गया। जगदलपुर शहर के कई निचले हिस्सों में भी पानी घुस गया। इसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया।
केंद्रीय जल आयोग, हैदराबाद की एडवाइजरी के मुताबिक ओडिशा के नवरंगपुर क्षेत्र में इंद्रावती नदी के ऊपरी हिस्से में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर जगदलपुर तक पहुंचने की संभावना है। आयोग के अनुसार आज (29 सितंबर) जगदलपुर स्टेशन पर नदी का जलस्तर 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक बढ़ सकता है। पानी तेजी से बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।
इसी इनपुट के बाद कलेक्टर आकाश छिकारा ने इंद्रावती नदी के तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने की अपील की है। अधिकारियों और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।
पानी बढ़ने के बाद जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। एक दिन पहले 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 821 लोगों को नावों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जबकि डोंगाघाट में फंसे 12 लोगों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जिले में 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कुल 8,894 लोगों को रखा गया है। शहरी क्षेत्र के 8 राहत शिविरों में 2,620 और ग्रामीण क्षेत्र के 57 शिविरों में 6,274 लोग रह रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है।
नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जोखिम न लें और तत्काल राहत शिविर या सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष या संबंधित राजस्व अधिकारी को सूचना देने को कहा गया है।
इस बीच छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर अब कमजोर पड़ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम ड्राई रहा। सरगुजा और बस्तर संभाग के एक-दो स्थानों पर ही हल्की बारिश हुई। अगले 4 से 5 दिनों में भी प्रदेश के कई जिलों में मौसम ड्राई रहने की संभावना है। राजनांदगांव 33 डिग्री तापमान के साथ सबसे गर्म रहा।



