
चक्रवाती तूफान अर्नब की मूसलाधार बारिश से 53 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी इंद्रावती नदी बस्तर में अब फिर तबाही मचाने वाली है। 8 मौतों के बाद भी इंद्रावती का तांडव थमा नहीं है। नदी का पानी अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं था कि ओडिशा ने नबरंगपुर डैम से 162 करोड़ (1.62 अरब) लीटर पानी इंद्रावती में छोड़ दिया। प्रशासन ने पूरे इलाके में रेड अलर्ट जारी कर दिया है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, ओडिशा के नबरंगपुर डैम से रविवार रात 1 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक 250 क्यूमेक, यानी हर सेकेंड 2.50 लाख लीटर पानी बहाया गया। इस तरह लगातार 18 घंटे में 162 करोड़ लीटर पानी बहाया जा चुका है। यह पानी इंद्रावती के रास्ते मंगलवार देर रात करीब 2 बजे जगदलपुर और तटवर्ती गांवों में पहुंचेगा। इससे बस्तर जिले के कई गांव एक बार फिर डूबने की स्थिति में आ गए हैं।
बाढ़ से अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। 12 लोगों को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। 821 लोगों को नावों से सुरक्षित निकाला गया है। अभी 8,894 लोग 65 राहत शिविरों में रह रहे हैं।
सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जगदलपुर पहुंचे। उन्होंने बाढ़ से मची तबाही का मंजर देखा। वह राहत शिविर पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों को 13 लाख रुपए के सहायता-चेक बांटे।
इंद्रावती का जल स्तर अभी 12.46 मीटर है। यह खतरे के निशान से 8.3 मीटर ऊपर है। इससे पहले 2020 में नदी का जल स्तर 10.00 मीटर तक गया था। इसके चलते नेशनल हाईवे डूब गया। हालांकि तब पानी 24 घंटे में उतर गया था। अगस्त 2022 में नदी का स्तर 10.40 मीटर था। 36 घंटे में पानी उतरने लगा। कुल मिलाकर तब इतना पानी नहीं आया था।
पुराने रिकॉर्ड खंगालें, तो 1973 में इंद्रावती नदी का जल स्तर 12.18 मीटर पहुंचा था। यानी तब भी जल स्तर अभी जितना नहीं बढ़ा था। कुल मिलाकर इंद्रावती नदी के जल स्तर ने इस बार पिछले 53 सालों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
बारिश थमने से नदी का पानी करीब 10% उतरा है, लेकिन परेशानियां कम नहीं हुई हैं। घरों में जमा कीचड़ और सड़ चुके सामान की सफाई सबसे बड़ी समस्या है। मंगलवार रात 2 बजे ओडिशा का पानी पहुंचने पर निचले इलाकों में दोबारा पानी भर सकता है। अगर फिर गांवों में पानी भरा, तो सुधार में लंबा वक्त लग सकता है। किसी तरह स्थितियां काबू में रहीं, तो भी हालात सामान्य होने में 4 से 5 दिन और लग सकते हैं।



