
रायपुर की खारुन नदी में आई बाढ़ ने कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद कर दी है। अमलेश्वर में 200 से ज्यादा परिवार इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई घरों में कमर तक नाले का पानी भर गया, कहीं सामान बह गया, किसी का व्यापार प्रभावित हुआ तो कहीं लाखों का नुकसान हुआ। इस दौरान कुछ परिवारों को होटलों में रहना पड़ा। कार और पिकअप भी डूब गई थीं।
दैनिक भास्कर की टीम कुछ प्रभावित इलाकों में पहुंची, जहां लोग घरों से कीचड़ निकाल रहे थे। फ्रिज, किताबें, बिस्तर और अलमारी पानी में तैर रहे थे। सोफा सेट, गद्दे, कॉपी-किताबें धूप में सुखाई जा रही थीं। ये स्थिति बाढ़ का पानी उतरने के बाद की थी। दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों के हालात का जायजा लिया। पानी उतरने के बाद भी कई घरों में बर्बादी का मंजर नजर आया। इस दौरान कई परिवारों को मदद नहीं मिली। लोगों का कहना है कि पीने के पानी के लिए भी उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
खारुन से लग कर ही पीटीआई कॉलोनी है। पुलिस की नौकरी से रिटायर्ड हुए संतोष अवस्थी बताते हैं कि उनके घर में कमर तक पानी भर गया। राशन, बेड, गद्दे और बेड में रखे गर्म कपड़े तक खराब हो गए। सभी सामान फेंकने पड़े। उनके मुताबिक घर में डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। बाढ़ के दौरान पीने का पानी भी नहीं मिला और एक दिन बिजली बंद रही। दोस्तों और आसपास के लोगों ने खाने-पीने की मदद की। संतोष बताते हैं कि 2007 में भी इसी तरह की बाढ़ आई थी। तब भी घरों में पानी घुसा था और सेंटरिंग की लकड़ियां तक बह गई थीं।
देव नगरी कॉलोनी की प्रियंका मालवीय के घर का बेड, फ्रिज, टीवी, दीवान, अलमारी, कपड़े और किताब-कॉपियां खराब हो गईं। उन्होंने भास्कर से बातचीत में कहा कि इंसान इतना ही कर सकता है कि अपनी जान बचाए या बिस्तर और सामान बचाए। आसपास के लोगों ने मदद की और खाने-पीने की चीजें भी पहुंचाईं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं आई।
रविशंकर तिवारी घर के बाहर सफाई करते और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करते मिले। उन्होंने कहा कि पानी कम हुए 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, फिर भी न ब्लीचिंग का छिड़काव हुआ, न नालियों की सफाई। जब टैक्स की वसूली के लिए कर्मचारी घर तक आ सकते हैं तो, बाढ़ में नुकसान देखने और सफाई करने कोई क्यों नहीं पहुंचा।
रुपल गुप्ता ने बताया कि उनका घर डूब गया था। घर का पूरा सामान खराब हो गया और अब सड़क पर पड़ा है। न सोने के लिए है, न बैठने के लिए, न खाने के लिए। सब में पानी चला गया है। रुपल के मुताबिक कॉलोनी के लोगों ने ही एक-दूसरे की मदद की। उनकी मांग है कि प्रशासन मौके पर आए, नुकसान देखे और मुआवजा दे।
अजीत तिवारी ने बताया कि उनके घर में पानी सीने तक पहुंच गया था। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। परिवार ने किसी तरह ऊपर जाकर खुद को बचाया। यहां हालत इतनी खराब थी कि पूरे परिवार को दो दिन होटल में जाकर रहना पड़ा। वे बताते हैं कि बाढ़ के दौरान न बचाव की कोई व्यवस्था दिखी और न कोई मदद करने आया। अब घर का सामान पानी में खराब होकर बिखरा पड़ा है। लाखों का नुकसान हुआ है। गृहस्थी प्रभावित हुई है, इसकी भरपाई कौन करेगा।
पीटीआई कॉलोनी के गणेश शर्मा बताते हैं कि शाम को बिजली चली गई और रातभर लोग पीने के पानी के लिए परेशान रहे। प्रशासन के अलावा कोई समाजसेवी संस्था भी हाल जानने नहीं पहुंची। कोई ये पूछने नहीं आया कि आपके पास पानी है या नहीं। दूसरे दिन 11 बजे पानी मिला। उन्होंने बताया कि उनके घर में खुद का बोर नहीं है। भोजन की भी कोई सरकारी व्यवस्था नहीं थी। पानी की इतनी समस्या हुई कि टॉयलेट जाने में भी परेशानी हुई। गणेश का कहना है कि बाढ़ के दौरान लोग इस डर में रात काट रहे थे कि हालात और बिगड़े तो क्या होगा।
अमलेश्वर नगर पालिका अध्यक्ष दयानंद सोनकर ने कहा कि बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि कई मकान टूटे हैं और नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। खेती को भी नुकसान हुआ है। खास तौर पर सब्जी की बाड़ियों को भी नुकसान हुआ है। इसके साथ वहां पटवारी को सर्वे के लिए कहा गया है। मुआवजे के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रशासन से आदेश मिलने के बाद मुआवजे को लेकर आगे कार्रवाई की जाएगी।
अमलेश्वर में बाढ़ का पानी उतर गया है, लेकिन लोगों की गृहस्थी उजड़ गई है। लोगों की शिकायत सिर्फ नुकसान की नहीं है। उनका कहना है कि मुसीबत के वक्त पीने के पानी और बचाव की मदद नहीं मिली। अब जब पानी उतर गया है तो भी उनका हाल जानने कोई नहीं पहुंचा। लोगों को अब नुकसान के सर्वे और मुआवजे का इंतजार है। नगर पालिका अध्यक्ष सर्वे कराने की बात कह रहे हैं। अब देखना यह है कि सड़क पर रखी इन गृहस्थियों का सरकारी सर्वे कब होता है और बाढ़ से उजड़े परिवारों तक राहत कब पहुंचती है और उन्हें कुछ मुआवजा मिलता है या नहीं।
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