कोरबा जिले में खरीफ फसल की गिरदावरी को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पटवारियों के बाद अब ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने भी पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी का कार्य करने से इनकार कर दिया है। कृषि विस्तार अधिकारियों ने उपसंचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्हें अतिरिक्त कार्य से मुक्त करने की मांग की है। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।
दरअसल, हर वर्ष खेतों में बोई गई फसलों का भौतिक सत्यापन कर खसरा वार फसल की जानकारी दर्ज की जाती है। इसी प्रक्रिया के आधार पर यह अभिलेख तैयार होता है कि संबंधित खेत में कौन-सी फसल बोई गई है। पूर्व में पटवारी अपनी आईडी के माध्यम से आनलाइन फसल की जानकारी दर्ज करते थे।
18 सितंबर को पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने के निर्देश जारी किए गए थे। पटवारियों ने तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए इस कार्य से दूरी बना ली। पटवारियों के स्तर पर गिरदावरी का काम प्रभावित होने के बाद जिन गांवों में सत्यापन बाकी है, वहां कृषि विभाग के मैदानी अमले से यह कार्य कराने की तैयारी की जा रही है।
इससे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग का मूल कार्य है। कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों पर पहले से ही विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ किसानों से जुड़े कई कार्यों की जिम्मेदारी है। ऐसे में अतिरिक्त कार्य सौंपे जाने से विभागीय कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि विस्तार अधिकारियों के अनुसार उन्हें फसल निरीक्षण, किसानों को तकनीकी सलाह, शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन, फसल सुरक्षा, कृषि आदानों की मांग, विभिन्न सर्वेक्षण सहित कई मैदानी कार्य करने होते हैं। इसके अलावा आनलाइन जीटी सर्वे का काम भी चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी जिम्मेदारियों के बीच गिरदावरी का अतिरिक्त काम करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है।
इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को कृषि विस्तार अधिकारी उपसंचालक कृषि कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने गिरदावरी के अतिरिक्त कार्य से मुक्त करने की मांग की। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांग पर निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन के स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।
जिले में कुल 712 गांव हैं। इनमें से 96 गांवों में खरीफ फसल की गिरदावरी अब तक पूरी नहीं हुई है। इन्हीं गांवों में लंबित भौतिक सत्यापन का कार्य कृषि विभाग के मैदानी अमले से कराने की तैयारी है। पटवारियों के बाद अब कृषि विस्तार अधिकारियों के भी विरोध में उतरने से प्रशासन के सामने लंबित गिरदावरी पूरी कराने की चुनौती बढ़ गई है।
समय पर फसल का भौतिक सत्यापन नहीं होने से संबंधित खेतों में बोई गई फसल की खसरा वार जानकारी दर्ज करने में देरी हो सकती है। इसका असर फसल संबंधी अभिलेखों को अपडेट करने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।



