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नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भिलाई-दुर्ग अंचल में राजनीतिक हलचल तेज, भाजपा ने प्रभारियों की नियुक्ति की

दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भिलाई-दुर्ग अंचल में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने भिलाई, भिलाई-चरोदा और रिसाली नगर निगम के लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर चुनावी तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। जिला और मंडल स्तर तक संगठन को जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

इसके विपरीत कांग्रेस की ओर से अभी तक निकाय चुनाव को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां सामने नहीं आई हैं। इससे कांग्रेस की चुनावी तैयारी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।

भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारी को संगठनात्मक स्तर से शुरू किया है। प्रभारियों की नियुक्ति के बाद वार्डवार राजनीतिक समीकरण, संभावित प्रत्याशी, बूथ स्तर की स्थिति और स्थानीय मुद्दों को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने और प्रत्येक वार्ड में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिखाई दे रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस की गतिविधियां फिलहाल सरकार और स्थानीय मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शन तथा आंदोलनों की तैयारियों तक अधिक केंद्रित नजर आ रही हैं। विभिन्न मुद्दों पर पार्टी की सक्रियता दिखाई दे रही है, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव को लेकर वार्ड स्तर की बैठकें, संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता और चुनावी रणनीति को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, संपत्ति कर और नगर निगम की कार्यप्रणाली जैसे विषय सीधे मतदाताओं से जुड़े होते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए वार्ड स्तर पर मजबूत संगठन और स्थानीय समस्याओं की पहचान चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।

भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगम क्षेत्रों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। भिलाई में औद्योगिक क्षेत्र और टाउनशिप से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं, जबकि रिसाली और भिलाई-चरोदा में ग्रामीण से शहरी स्वरूप में बदलते क्षेत्रों की समस्याएं भी चुनावी मुद्दा बन सकती हैं। ऐसे में तीनों निगमों के लिए अलग-अलग रणनीति की जरूरत होगी।

भाजपा की शुरुआती संगठनात्मक सक्रियता ने कांग्रेस के सामने भी चुनावी तैयारी तेज करने की चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन वार्डवार संगठन को सक्रिय करने, संभावित प्रत्याशियों की पहचान करने और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जितनी जल्दी शुरू होगी, राजनीतिक दलों के लिए उतना ही अधिक समय उपलब्ध होगा।

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