
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में आदिवासी महिला से गैंगरेप के मामले में करीब 2 साल 1 महीने बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है। 9 आरोपियों के खिलाफ दर्ज इस मामले में 2 आरोपियों को आजीवन कारावास और 4 को 20-20 साल की सजा दी गई है। 2 नाबालिगों का केस किशोर न्यायालय में चल रहा है, जबकि एक आरोपी की केस के दौरान मौत हो गई। आरोपियों ने महिला को धमकाकर तालाब के पास और एक खंडहर मकान में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया था। मामला पुसौर थाना क्षेत्र का है।
विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल के अनुसार मामला 19 अगस्त 2024 का है। 27 साल की पीड़िता घरेलू काम करती है। उसका साल 2018 में पति से तलाक हो चुका है। वह अपने माता-पिता, बड़े भाई और 9 साल के बेटे के साथ रहती है।
19 अगस्त की शाम करीब 6 बजे पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने रायगढ़ जा रही थी। केसाईपाली रोड पर मेन रोड के पास कृष्णा चौहान उर्फ राहुल चौहान अपने चार साथियों के साथ खड़ा था। पीड़िता की पहले से कृष्णा से पहचान थी। आरोपियों ने उसे रुकने के लिए कहा। इसके बाद हाथ पकड़कर तालाब की ओर ले गए। पीड़िता ने विरोध किया तो उसे जान से मारने और शव फेंकने की धमकी दी गई।
अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने पीड़िता को तालाब के किनारे पचरी घाट पर ले जाकर उसके साथ रेप किया। पहले कृष्णा चौहान ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद उसके साथियों ने बारी-बारी से वारदात को अंजाम दिया।
इसके बाद कृष्णा चौहान और उसका एक साथी पीड़िता को धमकाते हुए खेत के रास्ते मंदिर के पास ले गए। वहां एक कमरे के खंडहर मकान में कृष्णा ने दोबारा उसके साथ रेप किया। उसका साथी कमरे के बाहर खड़ा रहा। इसके बाद कृष्णा पीड़िता को अपने घर की ओर ले गया। उसने धमकी दी कि अगर उसने किसी को घटना के बारे में बताया या चिल्लाई तो वह और उसके साथी उसे जान से मारकर फेंक देंगे।
कृष्णा का घर बंद था। वह पीड़िता को बाहर छोड़कर दीवार के रास्ते घर के अंदर चला गया। इसके बाद पीड़िता ने मौका पाकर दरवाजा खटखटाया। वहां मौजूद एक महिला को उसने बताया कि कृष्णा उसे जबरदस्ती लेकर आया है। महिला ने उसकी बात नहीं सुनी और दरवाजा बंद कर दिया। पास में बैठी कुछ महिलाओं को पीड़िता ने बताया कि कृष्णा उसे जबरदस्ती लाया था और उसके साथ गलत काम किया गया है।
इसके बाद पीड़िता ने गांव के सरपंच को फोन कर बताया कि केसाईपाली के कुछ लड़कों ने उसे घेर लिया है और घर नहीं जाने दे रहे हैं। सरपंच मौके पर पहुंचा और उसे बाइक से गांव लेकर आया। रास्ते में पीड़िता ने उसे पूरी घटना बताई। सरपंच ने उसे घर छोड़ा और परिवार से सलाह के बाद जानकारी देने की बात कही। डर के कारण पीड़िता ने उसी दिन परिवार को कुछ नहीं बताया। अगले दिन उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पीड़िता अपनी मां और सरपंच के साथ थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया। मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं और पीड़िता का जाति प्रमाण पत्र जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपियों और पीड़िता का डीएनए परीक्षण भी कराया। इसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
अभियोजन के अनुसार मामले में दो नाबालिगों के खिलाफ अलग से चालान किशोर न्यायालय में पेश किया गया। इनमें एक फरार था, जिसकी बाद में मौत हो गई। इसके बाद उसका मामला अलग कर दिया गया।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सचीदानंद साहू उर्फ मुनु और उत्तम मिर्धा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं कृष्णा चौहान, नरेंद्र सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को 20-20 साल के कारावास की सजा दी गई। सभी को अर्थदंड से भी दंडित किया गया। मामले में विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने पैरवी की।



