अंबिकापुर शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप बेशकीमती जमीन की कूटरचना कर खरीद-बिक्री के बहुचर्चित प्रकरण में आरोपित जयनगर निवासी आजाद इराकी को दी गई जमानत के विरुद्ध प्रशासन सक्षम न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करेगा। कलेक्टर अजीत वसंत ने जमानत आदेश के विरुद्ध तत्काल सक्षम न्यायालय में अपील करने हेतु उप संचालक अभियोजन को निर्देशित किया है।
आरोपित आजाद इराकी को सरगुजा पुलिस ने रायपुर से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में प्रस्तुत किया था और अदालत द्वारा उसी दिन जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया गया था।
शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित रिंग बांध तालाब की भूमि खसरा क्रमांक 3714 से संबंधित राजस्व प्रकरण, भूमि के कथित अवैध अंतरण तथा आरोपित आजाद इराकी से जुड़े मामलों को लेकर बुधवार को जिला प्रशासन ने वस्तुस्थिति स्पष्ट की है। यह ऐसा मामला है जिसमें जलस्रोत को पाटने के साथ ही आदिवासी की जमीन को कूटरचना कर गैर आदिवासी के नाम पर अंतरित किया गया था। बाद में इसी जमीन को बेच दिया गया था। मुख्य आरोपित आजाद इराकी सहित नौ लोगों के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत किया गया था, लेकिन उसे तत्काल जमानत मिल गई थी।
कलेक्टर अजीत वसंत ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के जांच प्रतिवेदन, प्रकरण में हुई वैधानिक कार्रवाई तथा उपलब्ध न्यायालयीन अभिलेखों के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि राजस्व, निगम तथा पुलिस विभाग द्वारा विधि के अनुसार कार्रवाई की गई है।
रिंग बांध तालाब को अवैध रूप से पाटने के संबंध में शिकायतकर्ताओं द्वारा अप्रैल 2026 में शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत प्राप्त होने के उपरांत अवैध रूप से पाटे गए तालाब को खाली करने हेतु राजस्व विभाग एवं नगर निगम के कर्मचारियों को आदेशित किया गया था। नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा तालाब से मिट्टी हटाने के दौरान आरोपित आजाद इराकी द्वारा शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी गई थी।
उक्त घटना के पश्चात आरोपित आजाद इराकी के विरुद्ध थाना मणिपुर में बीएनएस की धाराओं के तहत केस पंजीबद्ध किया गया तथा अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज द्वारा आरोपित आजाद इराकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई। जिला न्यायालय से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के पश्चात आरोपित आजाद इराकी की तलाश पुलिस कर रही थी कि इधर इराकी ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में अग्रिम जमानत हेतु याचिका दायर किया था। उच्च न्यायालय द्वारा आरोपित को 13 मई 2026 को अग्रिम जमानत प्रदान की गई।
प्रकरण के जांच के क्रम में यह पाए जाने पर कि खसरा क्रमांक 3714 के नामांतरण में अनियमितता हुई है, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अंबिकापुर द्वारा उक्त नामांतरण की वैधता के परीक्षण हेतु प्रकरण दर्ज किया गया। सरगुजा कमिश्नर न्यायालय द्वारा आदेश देने के पश्चात अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा पुनरीक्षण हेतु उक्त प्रकरण को कलेक्टर न्यायालय को प्रेषित किया गया, जहां उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण की आगामी सुनवाई पर रोक लगा दी गई है।
जांच के ही क्रम में एक अन्य शिकायत प्राप्त हुई कि खसरा नम्बर 3714 अधिकार अभिलेख 1955-56 में आदिवासी वर्ग के व्यक्ति के नाम पर थी। उक्त बिंदु पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अंबिकापुर से जांच कराई गई। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि दस्तावेजों में कूटरचना कर आरोपित आजाद इराकी द्वारा आदिवासी वर्ग की भूमि को अपने नाम (गैर आदिवासी) पर खरीद लिया गया है, जो कि भू राजस्व संहिता 1959 के प्रविधानों का उल्लंघन है तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध है।
जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत आरोपित आजाद इराकी के विरुद्ध थाना मणिपुर में बीएनएस की धाराओं के तहत दिनांक 24 सितंबर 2026 को केस दर्ज किया गया। इस बार पुलिस ने देरी नहीं की। आरोपित को रायपुर से गिरफ्तार किया गया। केस दर्ज होने के पश्चात न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अरिन्दम नेरल के द्वारा आरोपित आजाद इराकी को 25 सितंबर 2026 को जमानत पर रिहा किया गया।
सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि उप संचालक अभियोजन ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत को प्रेषित अपने प्रतिवेदन में जमानत के उपरोक्त आदेश में कई त्रुटियों का उल्लेख किया गया है। प्रकरण की गंभीरता तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों को देखते हुए उपरोक्त जमानत आदेश के विरुद्ध तत्काल सक्षम न्यायालय में अपील करने हेतु उप संचालक अभियोजन को निर्देशित किया गया है। जिला प्रशासन की इस पहल से प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप रिंग बांध की जमीन के शासकीय उपयोग की संभावना को बल मिला है।



