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सीतापुर में 24 घंटे के लिए बने एबीईओ, अगले ही दिन आदेश निरस्त

सरगुजा जिले के शिक्षा विभाग में एक आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे लोग एक दिन का एबीईओ की संज्ञा दे रहे हैं। मामला सीतापुर विकासखंड का है, जहां सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है। शासन स्तर से इस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं हो पा रही है, जिससे ब्लॉक शिक्षा कार्यालय का काम प्रभावित हो रहा है।

इसी कमी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने 24 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी किया। तात्कालिक व्यवस्था के तहत संकुल शैक्षिक समन्वयक संकुल आदर्श नगर सीतापुर के सुशील मिश्रा को अपने मूल कार्य के साथ-साथ सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी सीतापुर का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया।

आदेश में कहा गया कि नियमित पदस्थापना होने पर यह आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा और यह तत्काल प्रभावशील होगा। लेकिन इस आदेश की स्याही सूखती, इससे पहले ही दूसरा आदेश आ गया। ठीक अगले ही दिन 25 सितंबर 2026 को डीईओ ने आदेश जारी कर अपने ही पिछले आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। यानी सुशील मिश्रा महज 24 घंटे के लिए ही एबीईओ बन पाए।

शिक्षा विभाग में इन दिनों संलग्नीकरण समाप्त करने का निर्देश है। शासन ने सभी अटैचमेंट खत्म कर शिक्षकों को मूल पदस्थापना में भेजने का दावा किया है। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर जुगाड़ से संलग्न करने की शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में एक सीएसी को एबीईओ का प्रभार दिया जाना सवालों के घेरे में आ गया।

बताया जा रहा है कि इसकी शिकायत हुई और कारण जानने लोग पत्र भेजने लगे, इसी कारण से डीईओ को अपना ही आदेश 24 घंटे के भीतर वापस लेना पड़ा। अब स्थिति यह है कि सीतापुर में सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी का पद फिर से खाली हो गया है। कामकाज प्रभावित हो रहा है और शिक्षक कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

वहीं एक दिन के एबीईओ का यह आदेश शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। इधर एक दिन के लिए सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी नियुक्त हुए सुशील मिश्रा ने कहा है कि जिम्मेदारी मिलना अधिकारियों का निर्णय था, उसे निभाना मेरा कर्तव्य था और उसे वापस लेना भी व्यवस्था का निर्णय है।

सुशील मिश्रा ने कहा कि मेरी निष्ठा किसी पद की मोहताज नहीं है। मैं कल भी शिक्षक था, आज भी शिक्षक हूँ और आगे भी अपने विद्यार्थियों, अपने सहकर्मियों और अपने कर्तव्य के प्रति उसी ईमानदारी से खड़ा रहूँगा। आपका सम्मान और विश्वास मेरे लिए किसी भी पद से बड़ा है।

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