
डॉ. ममता सिंह के कथित व्हाट्सएप निर्देश के बाद उठे सवाल, मरीजों को निर्धारित निजी लैब में जांच कराने के आरोप; कमीशनखोरी की आशंका पर जवाब की मांग
जशपुरनगर -: जिला अस्पताल जशपुर में मरीजों की जांच व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुप में डॉ. ममता सिंह की ओर से जारी कथित निर्देश के अनुसार, ‘अटल आरोग्य लैब’ में उपलब्ध नहीं होने वाली जांचों को ‘आयुष लैब’ के माध्यम से आउटसोर्स कराने की बात कही गई है। साथ ही मरीजों और कर्मचारियों को सैंपल जिला अस्पताल की लैब में ही जमा कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच के लिए सिर्फ आयुष लैब को ही क्यों चुना गया? क्या जिले में अन्य अधिकृत निजी लैब उपलब्ध नहीं हैं? क्या मरीज अपनी इच्छा से किसी दूसरी मान्यता प्राप्त लैब में जांच नहीं करा सकता? यदि सरकारी अस्पताल में जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो मरीजों को एक निर्धारित निजी लैब की ओर भेजने के पीछे क्या कारण है?मामले को लेकर कमीशनखोरी के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एक ही निजी लैब के माध्यम से जांच कराने की व्यवस्था ने पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित निजी लैब में कर्मचारियों की संख्या सीमित है, तो जांच रिपोर्ट में देरी या किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी? मरीजों से जांच के नाम पर ली जाने वाली राशि और निजी लैब के चयन की प्रक्रिया भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
बताया जा रहा है कि अंबिकापुर और रायपुर में ‘HLL Lab System’ पूरी तरह शुरू होने तक यह अस्थायी व्यवस्था लागू रहेगी। लेकिन मरीजों और उनके परिजनों का सवाल है कि इस अस्थायी व्यवस्था में उनकी सुविधा और अधिकारों की अनदेखी क्यों की जा रही है?
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर स्पष्ट करे कि निजी आयुष लैब को जांच आउटसोर्स करने का निर्णय किन नियमों और प्रक्रिया के तहत लिया गया है। यदि जांच के नाम पर किसी भी प्रकार की कमीशनखोरी या आर्थिक अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।



