दुर्गा पूजा से पहले एसईसीएल के कोयला कर्मियों को इस बार 1.10 लाख रुपये तक प्रदर्शन (पीएलआर) आधारित बोनस मिलने की उम्मीद है। पिछले वर्ष 1.03 लाख रुपये मिले थे। कोल इंडिया प्रबंधन और केंद्रीय ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के बीच अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित बैठक में इस पर अंतिम निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है।
कोयला कर्मियों को हर वर्ष दुर्गा पूजा से पहले प्रदर्शन आधारित पुरस्कार मिलने की परंपरा रही है। आगामी 11 अक्टूबर से नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। इसके पहले बोनस को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा, कुसमुंडा, दीपका सहित अन्य क्षेत्र में कार्यरत 33 हजार समेत कोल इंडिया की सभी आनुषांगिक कंपनी में कार्यरत 2.10 हजार कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा।
बोनस की राशि तय करने की प्रक्रिया इस बार सामान्य वर्षों से कुछ अलग नजर आ रही है। कोल इंडिया की 11वीं संयुक्त द्विपक्षीय समिति (जेबीसीसीआई) की अवधि जून 2026 में समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक 12वीं समिति का गठन नहीं हुआ है। ऐसे में बोनस वार्ता किस समिति या व्यवस्था के तहत होगी, इसे लेकर श्रमिक संगठनों में चर्चा रही है।
फिर भी दुर्गा पूजा से पहले भुगतान की परंपरा को देखते हुए प्रबंधन और यूनियनों के बीच अलग से वार्ता कर राशि तय किए जाने की संभावना है। यहां बताना होगा कि एसईसीएल में पिछले वर्ष करीब 34,500 कर्मियों को 1.03 लाख रुपये की दर से बोनस दिए जाने पर लगभग 356 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
इस वर्ष एक सितंबर की स्थिति में एसईसीएल में 33,231 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी एक साल में नियमित कर्मियों की संख्या करीब 1,200 कम हुई है। कर्मियों की संख्या घटने के बावजूद यदि इस बार प्रति कर्मचारी बोनस बढ़ता है तो कुल भुगतान का आकार पिछले वर्ष के आसपास रह सकता है।
एसईसीएल के अलावा कोल इंडिया की अन्य अनुषंगी कंपनियों में बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल, डब्ल्यूसीएल, एनसीएल, एमसीएल और सीएमपीडीआईएल के कर्मचारी शामिल हैं। जिन्हें वर्ष बोनस दिए जाने से कोल इंडिया पर 2,153.82 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आया था।
एसईसीएल की बड़ी खदानों के कारण कोरबा में बोनस का असर केवल कर्मचारियों के घरों तक सीमित नहीं रहता। दशहरा और दीपावली के आसपास मिलने वाली एकमुश्त राशि से वाहन, इलेक्ट्रानिक सामान, कपड़े, घरेलू उपयोग की वस्तुओं सहित अन्य खरीदारी बढ़ती है। इसलिए बोनस की घोषणा का इंतजार कर्मियों के साथ स्थानीय कारोबारियों को भी रहता है।
बोनस की राशि में लंबे समय से बढ़ोतरी का क्रम रहा है। वर्ष 2015-16 में 54 हजार रुपये मिले थे। 2022 में यह 76,500 रुपये, 2023 में 85 हजार रुपये, 2024 में 93,750 रुपये और 2025 में 1.03 लाख रुपये पहुंच गया। इस बार सात हजार रुपये तक वृद्धि किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बैठक में सहमति बनने पर ही अंतिम राशि रुप से राशि स्पष्ट हो सकेगी।
वर्ष 2025 में 25 सितंबर को मानकीकरण समिति की बैठक के बाद बोनस की घोषणा हुई थी और इसका लाभ कोल इंडिया तथा उसकी अनुषंगी कंपनियों के कार्यकारी कर्मियों को मिला था। इस बार भी कर्मचारियों की नजर अब अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली संभावित बैठक पर है। हालांकि बैठक की सूचना अभी तक श्रमिक संघ प्रतिनिधियों को नहीं दी गई है, पर संभावना जताई जा रही है कि एक-दो दिन के भीतर प्रबंधन द्वारा सर्कुलर जारी करने के साथ श्रमिक संघ को बैठक में आमंत्रित किया जाएगा।



