भोरमदेव का जंगल दिन के उजाले में जितना जाना-पहचाना लगता है, सूरज ढलते ही उसकी दुनिया उतनी ही रहस्यमयी हो जाती है। अंधेरे में पत्तियों की सरसराहट किसकी मौजूदगी का संकेत है, कौन सा वन्यजीव किस रास्ते से गुजर रहा है और जंगल की खामोशी के पीछे कितनी हलचल छिपी है, अब इन सवालों के जवाब किताबों में नहीं, जंगल के बीच तलाशे जाएंगे। पहली बार संरक्षण सप्ताह की गतिविधियों का केंद्र केवल जागरूकता नहीं, बल्कि युवाओं को जंगल का प्रत्यक्ष अनुभव कराने और उसकी बदलती चुनौतियों को जमीन पर समझाने पर रखा गया है।
02 से 08 अक्टूबर तक भोरमदेव अभयारण्य में होने वाली गतिविधियां युवाओं को जंगल के उस चेहरे से परिचित कराएंगी, जो आम पर्यटक की नजर से अक्सर छूट जाता है। वन नाइट-लाइफ से लेकर तितली और प्रकृति भ्रमण, पेड़-पक्षियों की पहचान, वन्यजीव गलियारों की समझ और ट्रैप कैमरों की निगरानी तक हर गतिविधि के पीछे जंगल को देखने के बजाय उसे पढ़ने की कोशिश है।
03 अक्टूबर को चिल्फी में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता सत्र के साथ स्थानीय युवाओं को वन नाइट-लाइफ का अनुभव कराया जाएगा। रात में जंगल का व्यवहार बदल जाता है। कई वन्यजीव सक्रिय होते हैं और दिन में दिखाई नहीं देने वाली गतिविधियां आवाजों, हलचल और पदचिह्नों के रूप में सामने आती हैं। युवाओं के लिए यह केवल जंगल घूमने का अनुभव नहीं होगा। कोशिश होगी कि वे समझें कि जंगल रात में भी पूरी तरह जीवंत रहता है और हर आवाज के पीछे प्रकृति की अपनी एक कहानी होती है।
04 अक्टूबर को भोरमदेव से थावरझोल तक प्रकृति भ्रमण में तितलियों की पहचान और उनके प्राकृतिक आवास को समझाया जाएगा। 05 अक्टूबर को करियामा गेट क्षेत्र में महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को पेड़, पक्षियों और तितलियों की पहचान से जुड़ी फील्ड शिक्षा दी जाएगी। बड़े वन्यजीवों के बीच अक्सर नजरअंदाज हो जाने वाली तितलियां भी जंगल के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत देती हैं। कौन सी प्रजाति कहां मिल रही है, उसके आसपास किस तरह की वनस्पति है और मौसम के साथ उसकी मौजूदगी कैसे बदलती है, ऐसे सवाल युवाओं को जैव विविधता को नए नजरिए से देखने का अवसर देंगे।
06 अक्टूबर को अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों को वन्यजीव गलियारों, अवैध गतिविधियों, ट्रैप कैमरा और गश्ती व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। वन्यजीव किस रास्ते से गुजरते हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी आवाजाही कैसी है, इसे समझने में ट्रैप कैमरे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यानी जंगल की सुरक्षा अब केवल जंगल में मौजूद रहकर निगरानी करने तक सीमित नहीं है। तकनीक भी जंगल की बदलती तस्वीर दर्ज कर रही है।
07 अक्टूबर को वन्यजीव फिल्म, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर और पत्थर चित्रकारी के जरिए विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा। वन्यजीव फोटोग्राफी और रील्स प्रतियोगिता युवाओं को जंगल को अपने नजरिए से दर्ज करने का अवसर देगी। 08 अक्टूबर को विजेताओं का सम्मान किया जाएगा।
वन्यजीव संरक्षण तभी मजबूत होगा जब लोग जंगल को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में समझेंगे। युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भोरमदेव आने वाले पर्यटकों से प्लास्टिक और कचरा नहीं फैलाने तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। क्योंकि जंगल की असली खूबसूरती सिर्फ उसकी तस्वीर लेने में नहीं, बल्कि उसकी खामोशी, जैव विविधता और वन्यजीवों की दुनिया को सुरक्षित रखने में है।



