जशपुरनगर जिले के ग्राम पाकरगांव में पोल शिफ्टिंग के दौरान बिजली के तार की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने 50-50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर शव लेने से इंकार कर दिया है। ग्रामीण बुधवार को सिविल अस्पताल के सामने दिन भर धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करते रहे, जबकि प्रशासन उन्हें समझाने में जुटा रहा।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ग्राम पाकरगांव में पोल शिफ्टिंग के दौरान छह मजदूर विद्युत प्रवाहित करंट की चपेट में आ गए थे। बताया जाता है कि जिस स्थान पर पोल शिफ्टिंग का कार्य चल रहा था, वहां पास से ही 11,000 वोल्ट सप्लाई के तार भी गए हुए थे। शिफ्टिंग के दौरान पोल बिजली प्रवाहित तार के संपर्क में आ गया, जिससे कार्य में लगे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
इस घटना में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका सिविल अस्पताल में उपचार जारी है। वहीं दो अन्य मजदूरों को मामूली चोटें आईं और वे बाल-बाल बच गए। घटना से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी फैल गई है।
बुधवार की सुबह दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाने थे, परंतु परिजन मृतकों के परिवार को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर अड़ गए। उन्होंने मांग पूरी होने तक शव लेने से इंकार कर दिया और सिविल अस्पताल के सामने ही धरने पर बैठ गए।
धीरे-धीरे कांग्रेसी भी इसमें जुटने लगे। दिग्गज कांग्रेसी नेता और पत्थलगांव के पूर्व विधायक रामपुकार सिंह, कुनकुरी के पूर्व विधायक तथा वर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष यू डी मिंज, जिला उपाध्यक्ष कुलविंदर सिंह भाटिया, लैलूगा के पूर्व विधायक हृदयराम राठिया, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री श्रीमती आरती सिंह, हंसराज अग्रवाल, कुनकुरी के नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील, प्रदेश सचिव मनोज तिवारी, प्रदेश सदस्य रत्ना पैंकरा, हरगोविंद अग्रवाल, अंकित शर्मा समेत अन्य कार्यकर्तागण पीड़ित परिवार के समर्थन में मौके पर आ जुटे।
ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन दिन भर चलता रहा और वे अपनी मांगों को लेकर यहां डटे रहे। राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के साथ ही पुलिस के अनुविभागीय अधिकारी धुर्वेश जायसवाल, थाना प्रभारी जितेन्द्र ताम्रकार दल बल के साथ मौके पर रहकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे, परंतु ग्रामीण टस से मस नहीं हुए।
ग्रामीणों ने शाम चार बजे तक मांग पूरी नहीं होने पर चक्काजाम का अल्टीमेटम दे रखा था। जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर उसे बाधित कर दिया। इससे आवागमन पूरी तरह ठप पड़ गया। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए एहतियातन पुलिस द्वारा शहर के बाहर ही बैरिकेड लगाकर भारी वाहनों को वहीं पर रोक दिया गया था, जिससे राजमार्ग पर आवागमन बंद हो जाने के बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। देर शाम तक ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी है और कांग्रेसी नेता भी ग्रामीणों के साथ मौके पर डटे हुए हैं।
घटना में मृत मजदूर अलेख एक्का और टोमन ध्रुव के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अधिकारियों ने उनके स्वजनों को अंतिम संस्कार के लिए शव को सौंपने का प्रयास किया था। लेकिन स्वजनों ने शव को लेने से इंकार करते हुए धरने में बैठ गए हैं। घटना से नाराज स्वजन 50 लाख मुआवजा और नौकरी की मांग पर अड़े हुए हैं।
मंगलवार को हुई दुर्घटना के बाद जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मृत मजदूरों के स्वजनों के समर्थन में कांग्रेस खुलकर सामने आ गई है। धरना स्थल पर पत्थलगांव के पूर्व विधायक रामपुकार सिंह, कुनकुरी के पूर्व विधायक यूडी मिंज डटे हुए हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वीडियो कॉल से पीड़ित परिवार से बात की है। इसके बाद भाजपाई भी सक्रिय होते नजर आए। गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के पहुंचने की बात कही जा रही है। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच पीड़ित परिवारों के मान-मन्नोवल की सारी कोशिश समाचार लिखे जाने तक सफल नहीं हो सकी थी। पीड़ित परिवार धरना स्थल पर डटे रहने के लिए तंबू और गद्दे की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।



