
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा है। बताया जा रहा है कि आयुष्मान कार्ड से फर्जी इलाज किए जाने की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद बुधवार को विभाग ने यह कार्रवाई की। जानकारी के मुताबिक 17 अस्पतालों को चिन्हांकित किया गया था। इन अस्पतालों का निरीक्षण कर जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डीबी स्टार की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर यह कार्रवाई की है। डीबी स्टार ने आयुष्मान कार्ड से फर्जी इलाज और मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों का खुलासा किया था। इसके बाद जांच के लिए 52 अफसरों की 17 टीमें बनाई गईं, जिन्होंने इन अस्पतालों में पहुंचकर मरीजों की भर्ती और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में ऐसे मरीज भर्ती मिले, जिनका रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा पाया। कुछ मरीज ICU में भर्ती बताए गए, लेकिन उनकी भर्ती से जुड़े दस्तावेज और फाइल भी नहीं मिली। कई जगह फाइल उपलब्ध कराने में 10 से 15 मिनट लगे, जबकि मरीज के भर्ती रहने के दौरान उसकी फाइल बेड के पास होनी चाहिए।
जांच में वरदान अस्पताल में भी गड़बड़ी सामने आई। 28 सितंबर की सुबह कुछ ही समय के अंतराल में 19 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। इनमें एक मरीज महासमुंद और 18 ओडिशा के बताए गए। वहीं, 30 सितंबर को जांच के दौरान आयुष्मान योजना के सिर्फ 7 मरीज भर्ती मिले, जबकि अस्पताल में करीब 20 मरीज भर्ती थे। सामान्य दर्द जैसी शिकायत लेकर आए कुछ मरीजों को भी भर्ती किया गया था। टीम के अनुसार इनमें कुछ मरीज भर्ती किए जाने की स्थिति में नहीं थे।
जांच के बाद मेडिलाइफ सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन निरस्त करने और FIR के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम को मौके पर ही बताया गया कि किस अस्पताल में जाना है। वहीं, लोटस हॉस्पिटल एंड एडवांस यूरोलॉजी सेंटर को आगामी आदेश तक आयुष्मान योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। जांच में मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने की पुष्टि का भी उल्लेख है।
जांच के लिए निकली 17 टीमों के 52 अफसरों को सुबह करीब 10 बजे ही बताया गया कि किस शहर के किस अस्पताल में जाना है। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर अस्पतालों में गड़बड़ी मिली है और इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन ने कहा कि जिन अस्पतालों से ज्यादा शिकायतें मिली थीं, वहां कार्रवाई की गई है। लोटस और मेडिलाइफ पर कार्रवाई हो चुकी है, जबकि जांच अभी जारी है।
दैनिक भास्कर ने आयुष्मान योजना में चल रहे इस फर्जीवाड़े की पड़ताल के लिए 22 दिनों तक स्टिंग ऑपरेशन किया था। पड़ताल के दौरान अस्पतालों में डमी मरीजों की भर्ती, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इलाज दिखाने और क्लेम के बदले दलालों को कमीशन देने की जानकारी सामने आई थी। 28 सितंबर को भास्कर ने इस पूरे खेल का खुलासा करते हुए खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर विभाग की टीम ने रायपुर के कुछ निजी अस्पतालों में दबिश देकर मौके पर मरीजों, अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। अब 100 से ज्यादा अस्पतालों में जांच जारी है।
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि आयुष्मान कार्ड वाले गरीब लोगों को कमीशन का लालच देकर रायपुर लाया जा रहा था। अस्पतालों में बिना गंभीर बीमारी के मरीजों को भर्ती दिखाकर उनके हाथ में कैनुला और पट्टियां लगाई जा रही थीं। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1 से 2 लाख रुपए तक के क्लेम बनाए जा रहे थे। इस पूरे खेल में दलालों को 10 से 15% तक कमीशन देने की बात भी सामने आई थी।
जानकारी के मुताबिक, बीजू स्वास्थ्य कार्ड में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना ओडिशा सरकार की योजना है। छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों में भी पात्र मरीजों को इलाज की सुविधा मिलती है। इसके तहत पात्र परिवारों को सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। अस्पताल में मरीज की पात्रता और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद योजना के तहत इलाज किया जाता है।
आयुष्मान कार्ड स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ की पुरानी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में होता था। बाद में इसे केंद्र की आयुष्मान योजना के साथ जोड़ा गया। आयुष्मान कार्ड केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में अब आयुष्मान कार्ड/ई-कार्ड के जरिए रजिस्टर्ड हॉस्पिटलों में योजना के तहत इलाज की सुविधा मिलती है।



