
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रनचिरई थाना क्षेत्र के जोरातराई गांव में श्मशान के पास संदिग्ध गतिविधि को लेकर ग्रामीणों में दहशत और नाराजगी का मामला सामने आया है। 27 सितंबर की शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच श्मशान के पास दूसरे गांव से आए करीब 14 से 16 लोग पूजा-पाठ करते नजर आए। ग्रामीणों के मुताबिक, इनमें कुछ लोग एक-दूसरे का मुंडन भी कर रहे थे। लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को अपनी ओर आता देख कुछ लोग वहां से भाग गए, जबकि करीब छह लोग ग्रामीणों के पकड़ में आ गए।
ग्रामीणों ने पकड़े गए लोगों से पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर रनचिरई पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। पूरे मामले में 9 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। पुलिस ने उन्हें गुंडरदेही न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, 27 सितंबर की शाम श्मशान के पास अचानक दूसरे गांवों से आए लोगों की मौजूदगी दिखाई दी। यहां करीब 14 से 16 लोग मौजूद थे। इस दौरान कुछ लोग पूजा-पाठ कर रहे थे और एक-दूसरे का मुंडन करते नजर आए। श्मशान के पास इस तरह की गतिविधि देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ। सूचना गांव में फैलने के बाद कई लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों को आते देखकर वहां मौजूद कुछ लोग भाग निकले, जबकि करीब छह लोगों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। पकड़े गए लोगों से ग्रामीणों ने गतिविधि और वहां मौजूद होने का कारण पूछा, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
जिस स्थान पर पूजा-पाठ किया जा रहा था, वहां से करीब 60 नींबू, त्रिशूल, अलग-अलग प्रकार की मिट्टी और अन्य सामग्री मिली। इन सामग्रियों को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने वहां मुर्गों की बलि दिए जाने और उन्हें दफनाने की भी चर्चा की, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच में इस संबंध में क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। घटना के बाद से ग्रामीणों में श्मशान के पास हुई गतिविधि को लेकर दहशत का माहौल है।
पहली घटना के तीन दिन बाद 30 सितंबर को उसी क्षेत्र में एक बार फिर संदिग्ध सामग्री मिलने से गांव में चर्चा तेज हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक, पहली घटना वाले स्थान से कुछ दूरी पर पुल के पास मटकी, नारियल, धागा बांधी हुई सामग्री और एक सिक्का मिला। नई सामग्री मिलने के बाद ग्रामीणों ने इसे पहले हुई पूजा-पाठ की गतिविधि से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
श्मशान के पास पूजा-पाठ और मुंडन की गतिविधि सामने आने के बाद ग्रामीण इसे तंत्र-मंत्र की साधना से जोड़कर देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पितृ पक्ष से पहले श्मशान के पास इस तरह की गतिविधि होने से उनकी नाराजगी बढ़ी है। 30 सितंबर को दोबारा संदिग्ध सामग्री मिलने के बाद गांव में इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया। हालांकि, पूजा-पाठ का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इसका तंत्र-मंत्र से कोई संबंध था या नहीं, यह जांच का विषय है।
पुल के पास मटकी, नारियल और सिक्का मिलने के बाद गांव में एक और चर्चा शुरू हो गई है। कुछ ग्रामीण इसे गड़े धन की तलाश से जोड़कर देख रहे हैं। ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि कहीं श्मशान के पास की गई गतिविधि का संबंध जमीन में दबे धन की तलाश से तो नहीं था। हालांकि, गड़े धन की तलाश से जुड़ी इस आशंका की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वहां मौजूद लोग किस उद्देश्य से पूजा-पाठ कर रहे थे और बाद में मिली सामग्री का उससे कोई संबंध है या नहीं।
एडिशनल एसपी चंद्रकांत गवर्ना ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर रनचिरई थाने में मामला दर्ज किया गया है। पूरे मामले में 9 लोगों को गुंडरदेही न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। घटना के अगले दिन संदिग्ध लोगों की कुछ बाइक भी जब्त किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब मामले में सामने आए तथ्यों और सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
श्मशान के पास 27 सितंबर को हुई गतिविधि और 30 सितंबर को दोबारा मिली सामग्री ने गांव में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इसे तंत्र-मंत्र या गड़े धन की तलाश से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन अभी तक इन आशंकाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।



