
जशपुरनगर – राज्योत्सव जैसे गौरवशाली आयोजन के निमंत्रण पत्र को लेकर जशपुर जिले में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में जनपद पंचायत जशपुर की उपाध्यक्ष महोदया का नाम शामिल नहीं किए जाने से जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
दरअसल, जिला प्रशासन की ओर से जारी निमंत्रण पत्र में जिला पंचायत जशपुर के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, नगर पालिका के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा जनपद पंचायत जशपुर के अध्यक्ष महोदय का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया है। लेकिन इसी क्रम में जनपद पंचायत जशपुर की उपाध्यक्ष महोदया रचना कुशवाहा हैं जो अमित महतो वर्तमान ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जशपुर के अध्यक्ष पूर्व में जनपद सदस्य थे उनकी पत्नी का नाम गायब है। एक ही पंचायत संस्था के अध्यक्ष का नाम शामिल होना और उपाध्यक्ष की अनदेखी होना अब सवालों के घेरे में है।
क्या राजनीतिक विचारधारा बनी नाम छूटने की वजह?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनपद पंचायत जशपुर की उपाध्यक्ष महोदया का नाम निमंत्रण पत्र में क्यों शामिल नहीं किया गया? क्या यह महज एक प्रशासनिक चूक है या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं उपाध्यक्ष महोदया कांग्रेस पार्टी से होने के कारण तो उनके नाम को नजरअंदाज नहीं किया गया?हालांकि, नाम शामिल नहीं किए जाने के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है और न ही इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है।
राज्योत्सव पूरे जिले का आयोजन, सम्मान में भेदभाव क्यों?
राज्योत्सव किसी एक राजनीतिक दल, व्यक्ति या विचारधारा का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और गौरव का उत्सव है। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन में जिले के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करते समय प्रशासन से समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है।जब जिला पंचायत और नगरीय निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को निमंत्रण पत्र में स्थान दिया जा रहा है, तो जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष को इससे बाहर रखने का आधार क्या है? यदि यह अनजाने में हुई त्रुटि है तो प्रशासन को इसे स्वीकार करते हुए सुधार करना चाहिए। वहीं यदि इसके पीछे कोई अन्य कारण है तो उसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
जिला प्रशासन से उठी स्पष्ट जवाब की मांग
अब सवाल सीधे जिला प्रशासन से है कि जनपद पंचायत जशपुर की उपाध्यक्ष महोदया का नाम निमंत्रण पत्र में क्यों नहीं जोड़ा गया? क्या निमंत्रण पत्र तैयार करते समय सभी जनप्रतिनिधियों की सूची का सही ढंग से परीक्षण नहीं किया गया? या फिर किसी स्तर पर जानबूझकर अनदेखी हुई है? जनप्रतिनिधियों का सम्मान उनके पद और जनसेवा के आधार पर होना चाहिए, न कि उनकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सभी जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे।
फिलहाल, राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में नाम गायब होने का यह मामला प्रशासनिक चूक है या राजनीतिक भेदभाव, इसका जवाब जिला प्रशासन के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।



