
तीन दिन का अल्टीमेटम, प्रभार नहीं बदला तो आंदोलन की चेतावनी; वरिष्ठता और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
जशपुर, छत्तीसगढ़। जशपुर जिले में कनिष्ठ व्याख्याता को जिला अधिकारी का प्रभार सौंपने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों में भारी नाराजगी सामने आई है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ की जिला इकाई ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताया है। संघ ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि कनिष्ठ व्याख्याता से तत्काल प्रभार वापस लेकर किसी वरिष्ठ प्राचार्य को जिम्मेदारी सौंपी जाए। साथ ही प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

कनिष्ठ को प्रभार, वरिष्ठता का क्या हुआ?
कर्मचारी संघ ने अपने ज्ञापन में सवाल उठाया है कि जब विभाग में वरिष्ठ प्राचार्य उपलब्ध हैं, तो फिर एक कनिष्ठ व्याख्याता को जिला अधिकारी का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपने का आधार क्या है? संघ का कहना है कि इस निर्णय से विभागीय वरिष्ठता और कर्मचारियों के मान-सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जशपुर अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति बहुल जिला है। ऐसे महत्वपूर्ण जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने के निर्णय को लेकर पारदर्शिता और स्थापित नियमों का पालन जरूरी है। संघ ने आरोप लगाया है कि प्रभार सौंपने के मामले में वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया है, जिससे शिक्षा विभाग के भृत्य से लेकर वरिष्ठ प्राचार्य तक असंतोष का माहौल है।
तीन दिन में फैसला नहीं तो आंदोलन!
कर्मचारी संघ ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कनिष्ठ व्याख्याता से प्रभार वापस लिया जाए और वरिष्ठता के आधार पर किसी प्राचार्य को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी तीन दिनों के भीतर प्रभार बदलने को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन में आंदोलन की स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही गई है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन कर्मचारियों की इस नाराजगी को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या तीन दिन के भीतर प्रभार बदलने की मांग पर फैसला होगा, या फिर यह विवाद आंदोलन का रूप लेगा? फिलहाल कर्मचारी संघ की चेतावनी के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
तीन दिन की मोहलत खत्म होने के बाद जशपुर में कर्मचारी आंदोलन की स्थिति बनती है या प्रशासन विवाद को बातचीत से सुलझाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



