
जमीन विवाद में मारपीट और धान की फसल पर ट्रैक्टर चढ़ाने का मामला, सरपंच समेत 10 लोगों पर FIR; हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी आरोपियों के खुलेआम घूमने का आरोप
जशपुर/पत्थलगांव। जशपुर जिले में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “वारंटी पकड़ो महाअभियान” के बीच पत्थलगांव थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जमीन विवाद से जुड़े एक पुराने मामले में एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बावजूद संबंधित आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और गांव में खुलेआम घूम रहे हैं।
मामला पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत तुकुपखना से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत के अनुसार खेत में जमीन विवाद को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट की स्थिति निर्मित हुई। इस दौरान धान की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चढ़ाने और एक महिला के साथ मारपीट किए जाने के भी आरोप लगाए गए थे।
इस मामले में रघुनाथपुर के सरपंच गरीब साय सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। मामले में एससी/एसटी एक्ट सहित संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी। बताया जा रहा है कि आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका भी लगाई गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और गांव में बेखौफ घूम रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोपी पुलिस की नजर में वांछित हैं और न्यायालय से जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, तो फिर उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई?
वारंटी पकड़ो अभियान पर भी उठे सवाल
पत्थलगांव पुलिस सहित जिले की पुलिस द्वारा वारंटियों और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में तुकुपखना के इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई और अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जब पुलिस छोटे-बड़े मामलों में लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है, तो इस मामले में लंबे समय से गिरफ्तारी नहीं होने की वजह क्या है? क्या पुलिस को आरोपियों के संबंध में जानकारी नहीं है या फिर गिरफ्तारी को लेकर किसी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है?
पीड़ित पक्ष को न्याय का इंतजार
जमीन विवाद से शुरू हुए इस मामले में मारपीट और फसल को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष की स्थिति बनने की बात सामने आ रही है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और आरोपियों का पक्ष सामने आना भी बाकी है। ऐसे में पुलिस की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह होगा कि पत्थलगांव पुलिस इस मामले में कब तक कार्रवाई करती है और हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद खुलेआम घूमने के आरोपों पर पुलिस का क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।



