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जशपुर में तटबंध निर्माण में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल? भाजपा-कांग्रेस की कथित मिलीभगत से मुख्यमंत्री की छवि पर उठे सवाल..

गिट्टी की जगह लेटो पत्थर से बन रहा तटबंध, मजदूरों ने भी खोली पोल

जशपुरनगर -: जिले के बहोरा पंचायत अंतर्गत ग्राम जाड़ाकोना में तटबंध निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित गिट्टी की जगह बड़े पैमाने पर लेटो पत्थर का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी राशि से बनाए जा रहे तटबंध में खुलेआम निर्माण मानकों की अनदेखी की जा रही है। मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने भी कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्हें ठेकेदार द्वारा लेटो पत्थर से ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मजदूरों का कहना है कि “गिट्टी नहीं है, इसी से काम चलाना पड़ेगा।”

भाजपा और कांग्रेस की मिलीभगत का आरोप

मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस निर्माण कार्य में भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी फैजान सरवर और कांग्रेस समर्थित पूर्व सरपंच रविंद्र कुजूर मिलकर काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों ने स्वयं भी यह स्वीकार किया कि वे इस निर्माण कार्य को साथ मिलकर करा रहे हैं। इस कथित स्वीकारोक्ति के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और भाजपा-कांग्रेस की स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के आरोप तेज हो गए हैं।

सरपंच ने कहा – जांच कार्यवाही होगी साथ ही तटबंध फिर से बनेगा

मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्राम पंचायत बहोरा की सरपंच ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और तटबंध का निर्माण दोबारा कराया जाएगा।

एसडीओ बोले – जानकारी नहीं थी, खुद मौके पर जाकर करूंगा जांच

संबंधित विभाग के एसडीओ ने कहा कि उन्हें निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित सामग्री के स्थान पर दूसरी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है तो यह गंभीर अनियमितता और बड़ा भ्रष्टाचार है। उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर जांच करने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की छवि पर भी असर?

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि जशपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृह जिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सत्तारूढ़ दल के पदाधिकारी और विपक्ष से जुड़े लोग मिलकर इस प्रकार के कथित भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगे, तो इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा और सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे कार्यों से मुख्यमंत्री का नाम भी अनावश्यक रूप से खराब हो सकता है।

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