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जशपुर स्वास्थ्य विभाग की भर्ती पर सवालों का अंबार! मार्कशीट अपलोड नहीं, फिर भी पात्रता बहाल, तीसरी दावा-आपत्ति के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति

विज्ञापन में तीसरी दावा-आपत्ति का प्रावधान नहीं, फिर किसके आदेश पर मिली छूट? लिपिकीय त्रुटि बताकर विभाग ने झाड़ा पल्ला, अब दस्तावेज सत्यापन के बुलावे से फिर गरमाया मामला।

जशपुर स्वास्थ्य विभाग की लैब टेक्नीशियन भर्ती प्रक्रिया अब गंभीर सवालों के घेरे में है। छह पदों की भर्ती में एक अभ्यर्थी की मार्कशीट ऑनलाइन अपलोड नहीं होने के बावजूद पहले उसे पात्र घोषित किया गया, फिर अपात्र कर दिया गया और बाद में कथित तौर पर तीसरी दावा-आपत्ति के जरिए परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। अब एनआईसी की वेबसाइट पर उसी अभ्यर्थी को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया है।

मामले के अनुसार, 2 मार्च 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने को कहा गया था। गरियाबंद निवासी कामदेव, पिता मढ़ीराम की आवश्यक मार्कशीट अपलोड नहीं होने का मुद्दा सामने आया। पहली दावा-आपत्ति में उन्हें पात्र बताया गया, लेकिन 25 जून 2026 के बाद हुई सात दिवसीय दावा-आपत्ति प्रक्रिया में मार्कशीट अपलोड नहीं होने का हवाला देकर अपात्र घोषित कर दिया गया।

इसके बावजूद आरोप है कि तीसरी दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद उनकी पात्रता बहाल कर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई। जबकि भर्ती विज्ञापन में तीसरी दावा-आपत्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं था।

लिपिकीय त्रुटि बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?

मामले की शिकायत कलेक्टर और सीएमएचओ से की गई। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने व्हाट्सऐप के माध्यम से जवाब देते हुए इसे लिपिकीय त्रुटि बताया। लेकिन सवाल यह है कि यदि गलती लिपिकीय थी तो जिम्मेदार कौन है? मार्कशीट कब अपलोड हुई? अपात्र घोषित अभ्यर्थी की पात्रता किस अधिकारी के आदेश पर बहाल की गई?अब एनआईसी वेबसाइट पर दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने के बाद विवाद फिर गहरा गया है।

कलेक्टर और सीएमएचओ से उठे सीधे सवालक्या भर्ती विज्ञापन के नियम सभी अभ्यर्थियों के लिए समान थे? तीसरी दावा-आपत्ति किस नियम के तहत कराई गई? क्या अन्य अपात्र अभ्यर्थियों को भी ऐसा अवसर दिया गया? यदि किसी एक अभ्यर्थी को राहत दी गई तो उसका लिखित आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?छह पदों की भर्ती में पात्रता सूची बार-बार बदलना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। विभाग को मूल ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड की तारीख, सभी पात्रता सूचियों और पात्रता बहाली के आदेश सार्वजनिक करने चाहिए।

सरकारी भर्ती कोई मनमर्जी की व्यवस्था नहीं है। यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो विभाग दस्तावेजों के साथ जवाब दे, अन्यथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। अभ्यर्थियों को आश्वासन नहीं, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया चाहिए।

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