भारत सरकार और सोवियत संघ (रूस) के बीच 1950 के दशक में 10 लाख टन (1 मिलियन टन) क्षमता के इस्पात संयंत्र की स्थापना के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता देश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
इस संयंत्र के पहले ब्लास्ट फर्नेस का उद्घाटन 1959 में हुआ। तब से यह संयंत्र छत्तीसगढ़ का गौरव बना हुआ है और राज्य की औद्योगिक पहचान से जुड़ा हुआ है।
हाल ही में इस संयंत्र में हुई संगठित चोरी ने इस गौरव पर दाग लगाया है। संगठित चोरी की यह घटना संयंत्र की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली बताई जा रही है।
सीबीआई अब मामले की जांच कर रही है। जांच एजेंसी द्वारा मामले की पड़ताल शुरू कर दी गई है।



