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धमतरी के टिकरापारा में प्रार्थना सभा को लेकर जमकर विवाद, हिंदू संगठन और भीम आर्मी आमने-सामने

छत्तीसगढ़ के धमतरी में नेशनल हाईवे के पास टिकरापारा के एक घर में चल रही प्रार्थना सभा को लेकर जमकर विवाद हो गया। हिंदू संगठन ने सभा का विरोध करते हुए घर के बाहर नारेबाजी की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। कुछ देर बाद भीम आर्मी के लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस के साथ एसडीएम, एडिशनल एसपी, डीएसपी और महापौर भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग कर शांत कराया। यह मामला कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र का है।

धमतरी के टिकरापारा इलाके में नेशनल हाईवे के पास रविवार को एक घर में प्रार्थना सभा हो रही थी। प्रार्थना सभा में करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। प्रार्थना सभा की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता घर के बाहर पहुंच गए और विरोध करने लगे। कार्यकर्ता काफी देर तक नारेबाजी करते हुए प्रार्थना सभा को बंद करने की मांग करते रहे। इस दौरान कार्यकर्ता वहीं बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।

मामला बढ़ने की खबर आसपास के लोगों तक पहुंची तो मौके पर धीरे-धीरे भीड़ जुटने लगी। कुछ देर बाद भीम आर्मी के लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया। एसडीएम, एडिशनल एसपी और डीएसपी समेत प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। महापौर रामू रोहरा ने भी दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बैठकर बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की बात कही। हिंदू संगठन का विरोध करीब 5 घंटे तक चला।

हिंदू जागरण मंच के दीपक ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रशासन की मौजूदगी में शांति समिति की बैठक हुई थी। इसमें क्रिश्चियन फोरम और हिंदू संगठनों के बीच प्रार्थना सभाओं को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई थी। दीपक ठाकुर ने कहा कि बैठक में तय हुआ था कि प्रार्थना सभा में केवल ईसाई समुदाय के लोग ही शामिल होंगे। अगर किसी दूसरे धर्म का व्यक्ति सभा में शामिल होना चाहता है तो उसे पहले बपतिस्मा लेकर ईसाई धर्म अपनाना होगा।

दीपक ठाकुर का आरोप है कि इसके बावजूद पहले ही रविवार को हुई प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में गैर-ईसाई लोग शामिल हुए। उनका दावा है कि इनमें ऐसे लोग भी थे जो धर्म से ईसाई हैं और खुद को हिंदू बताते हैं और सरकारी सुविधाओं और आरक्षण का लाभ लेते हैं, लेकिन साथ ही ईसाई धर्म की प्रार्थना सभा में शामिल हो रहे हैं। दीपक ठाकुर ने कहा कि केरल, तमिलानाडु जैसे दूसरे राज्यों में लगातार धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं, जिससे वहां की डेमोग्राफी भी चेंज हो गई है। छत्तीसगढ़ में भी बहुत जोर-शोर से इन लोगों का काम चल रहा है और फॉरेन फंडिंग होती है। हिंदू संगठन लंबे समय से इन गतिविधियों का विरोध कर रहा है।

हिंदू जागरण मंच ने मांग की है कि मामले की जांच कर संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि अगर प्रार्थना सभा में गैर-ईसाई लोगों का शामिल होना तय शर्तों के खिलाफ है तो ऐसे लोगों और आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

क्रिश्चियन फोरम के जिला जनरल सेक्रेटरी डॉ. डायमंड फिलस ने हिंदू संगठन के आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि प्रार्थना सभा स्थलों पर जो सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, वे ईसाई समुदाय के लिए हैं। डायमंड फिलस ने कहा कि लगातार विरोध और रोक-टोक से विवाद बढ़ता है और ऐसी स्थिति में प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। क्रिश्चियन फोरम पहले भी धर्मांतरण के आरोपों से इनकार कर चुका है।

विवाद के बीच भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष मिलाप साहू भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का अधिकार देता है। भीम आर्मी ने कहा कि जहां भी किसी व्यक्ति के मौलिक या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, संगठन वहां आवाज उठाएगा। इससे पहले भी भीम आर्मी ने प्रार्थना सभा में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था।

मौके पर पहुंचे महापौर रामू रोहरा ने कहा कि मामला चिंता का विषय है। जानकारी मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि शहर की शांति और कानून-व्यवस्था सबसे जरूरी है। विवाद के बाद पुलिस और प्रशासन ने दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को संभाला। अधिकारियों ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था खराब नहीं होने दी जाएगी। दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बैठाने की बात कही गई है।

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