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मंत्रालय की बस में आग लगने के बाद आमानाका डिपो में 98 बसों की जांच, ज्यादातर में खामियां मिलीं

मंत्रालय की बस में आग लगने की घटना के बाद शनिवार को आमानाका डिपो में आरटीओ, मंत्रालय और पुलिस की संयुक्त टीम ने बसों की जांच की। शाम 5 बजे तक 98 बसें जांची गईं, जिनमें ज्यादातर में खामियां मिलीं। जांच रिपोर्ट जीएडी को सौंपी जाएगी।

जांच में सामने आया कि कई बसों के इमरजेंसी गेट नहीं खुले और उनके सामने अतिरिक्त सीटें लगी थीं। खिड़की तोड़ने के लिए हैमर नहीं मिले। ज्यादातर बसों में स्पीड गवर्नर और कैमरे भी नहीं हैं। जीपीएस-पैनिक बटन लगे हैं, लेकिन ऑपरेटर को कंट्रोल रूम की जानकारी नहीं है। फायर सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग ड्राइवरों को नहीं मिली। कई बसों के एक्सीलेटर की रेस भी अधिक मिली।

इधर, निगम की जांच में 107 में 97 यानी 90.7% बसें खराब मिलीं। इनमें 35 यानी 32.7% बेहद खराब थीं। सिर्फ 10 बसें पूरी तरह सही पाई गईं। गेट के सामने सीट, हॉर्न-वाइपर बंद सहित बसों में कदम-कदम पर खामियां मिलीं।

शनिवार दोपहर 12.10 बजे आमानाका डिपो में बसों की जांच कर खामियां दर्ज की गईं। सीजी04 ई3063 में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं था, रेस अधिक, झनझनाहट और एलईडी बंद मिली। पैनिक बटन की जानकारी ड्राइवर को नहीं थी। सीजी04 ई2724 का इंडिकेटर और बॉडी खराब थी। ड्राइवर संतोष भी पैनिक बटन से अनजान थे।

ई3075 में सील पैक फर्स्ट एड किट मिला, चालक रोशन लाल ने इसे उसी दिन मिलने की बात कही। एनडब्ल्यू5298 में इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट थी। ई2735 में स्पीड गवर्नर नहीं था, ब्रेक-बैक लाइट खराब थी।

ई2739 में कमजोर टायर, जाम इमरजेंसी एग्जिट, सामने सीट, बंद हॉर्न, खराब ब्रेक लाइट, वाइपर और व्हील नट गायब मिले, दोनों पहियों के ब्रेक कमजोर थे। बसों में हेल्पलाइन नंबर नहीं थे। कई ड्राइवर वर्दी-नेम प्लेट के बिना मिले।

पैनिक बटन भी बेअसर मिले। अफसरों के सामने बटन दबाया गया, लेकिन सवा घंटे बाद भी ऑपरेटर के मोबाइल-सिस्टम पर अलर्ट नहीं आया। जीपीएस लगा था, पर ऑपरेटर को कंट्रोल रूम की जानकारी नहीं थी।

फायर फाइटिंग में भी खामियां मिलीं। फायर सिस्टम बस में सिस्टम बंधा मिला। ड्राइवर को इसे चलाने की ट्रेनिंग नहीं थी। एक्सपायरी जांचने के लिए खोलने को कहा तो पांच मिनट में भी नहीं खोल पाया। जांच में खामी दर्ज हुई।

बस में आग लगने की घटना के बाद बसों की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद रिपोर्ट तैयार कर जीएडी को भेजी जाएगी। इसके आधार पर कार्रवाई करेंगे। यह जानकारी आरटीओ, रायपुर आशीष देवांगन ने दी।

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