
रायपुर और बिलासपुर अब सिर्फ अपने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने की कोशिश नहीं करेंगे, बल्कि देश के 50 चुनिंदा शहरों में स्वच्छता का मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। केंद्र सरकार की नई ‘प्रगति-50’ पहल में दोनों नगर निगमों का चयन हुआ है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को योजना का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े।
इस पहल को केवल झाड़ू लगाने या कचरा उठाने की योजना मानना ठीक नहीं होगा। इसका असली लक्ष्य शहर की पूरी स्वच्छता व्यवस्था को एक साथ ठीक करना है। प्रधानमंत्री की मई 2026 की ‘प्रगति’ बैठक में 50 शहरों को पूरी तरह स्वच्छ बनाने और ठोस व तरल कचरे के बेहतर निपटान के मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया था।
योजना के तहत सबसे पहले घर से निकलने वाले कचरे पर नजर रहेगी। घर-घर कचरा संग्रहण नियमित और प्रभावी करने के साथ गीले-सूखे कचरे को अलग करने पर जोर रहेगा। उद्देश्य यह है कि कचरा सिर्फ उठे नहीं, बल्कि सही जगह पहुंचे और उसका उपयोग या वैज्ञानिक तरीके से निपटारा हो। रायपुर से रोज करीब 550 टन और बिलासपुर में रोज 150 टन कचरा निकलता है।
कचरा उठाने के बाद असली काम की दिशा में कचरे को छांटने, उसकी प्रोसेसिंग और अंतिम निपटान की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। यानी डंपिंग ग्राउंड पर कचरा जमा करते जाने के बजाय उसके वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर रहेगा। रायपुर में संकरी में नया डंपिंग पाइंट तैयार है। यहां कचरे की प्रोसेसिंग हो रही है।
शहर की स्वच्छता सिर्फ ठोस कचरे तक सीमित नहीं होगी। इस्तेमाल हो चुके पानी का उपचार, उसे दोबारा उपयोग में लाना और पानी के उचित प्रबंधन की व्यवस्था भी योजना का अहम हिस्सा है। रायपुर में खारुन नदी में 206 एमएलडी के चार एसटीपी चल रहे हैं। इसके अलावा महाराजबंध, नरैया और खोखो तालाब में छह एमएलडी के तीन प्लांट चालू होने वाले हैं।
सार्वजनिक शौचालय, सड़कें, बाजार और दूसरे सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता में सुधार पर निगरानी बढ़ेगी। शहरों के प्रदर्शन की तय मानकों के आधार पर नियमित समीक्षा की जाएगी। अभी निगरानी का कोई सिस्टम नहीं है। अटेंडेंस लगाकर कर्मचारी गायब हो जाते हैं।
रायपुर और बिलासपुर को केंद्र सरकार से विशेषज्ञ तकनीकी सहयोग, मार्गदर्शन और बेहतर काम करने के तरीकों की जानकारी मिलेगी। यानी किसी समस्या का समाधान केवल स्थानीय स्तर पर खोजने के बजाय देश के दूसरे शहरों में अपनाए जा रहे सफल मॉडल भी यहां लागू किए जा सकेंगे। अभी इस दिशा में दोनों शहर काफी पिछड़े हुए हैं।
प्रगति-50 की खासियत यह है कि इन 50 शहरों में किए गए प्रयोग और सुधार सिर्फ उन्हीं तक सीमित रखने का लक्ष्य नहीं है। रायपुर और बिलासपुर में कचरा प्रबंधन, गंदे पानी के उपचार और नागरिक सुविधाओं में जो व्यवस्था सफल होगी, उसे प्रदेश के दूसरे नगरीय निकायों में भी अपनाया जा सकता है। इस लिहाज से दोनों शहरों के लिए चुनौती भी बड़ी है। अब सिर्फ सफाई का दावा नहीं, बल्कि कचरा कितना उठा, कितना अलग हुआ, कितना प्रोसेस हुआ, कितना निपटाया गया और गंदे पानी का कितना उपचार व पुन: उपयोग हुआ, इन परिणामों पर काम दिखाई देना होगा।
योजना में नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है। इसलिए घर से कचरा अलग देना, खुले में कचरा न डालना और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी इस मॉडल का हिस्सा होगा। बड़ा लक्ष्य रायपुर और बिलासपुर में ऐसा स्वच्छता सिस्टम तैयार करना है, जिसमें कचरा पैदा होने से लेकर उसके अंतिम निपटान तक और गंदे पानी के उपचार से लेकर उसके दोबारा उपयोग तक पूरी व्यवस्था निगरानी में हो।



