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छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: खारुन नदी का पुल डूबा, चित्रकोट जलप्रपात रौद्र, 3 की मौत, 3 लापता

छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश और गंगरेल बांध से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण रायपुर से लेकर बस्तर तक नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। राजधानी रायपुर में खारुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने से रायपुर-दुर्ग को जोड़ने वाला पुराना पुल डूब गया और उस पर करीब एक फीट पानी बहने लगा। वहीं बस्तर में इंद्रावती नदी के उफान से चित्रकोट जलप्रपात ओवरफ्लो होकर रौद्र रूप में आ गया है।

प्रदेश भर में उफनते नदी-नालों में कुल 12 लोग बह गए/फंसे। इन हादसों में 3 लोगों की जान चली गई। रायपुर और बिलासपुर में 2 बच्चे डूबे, जबकि कांकेर में बारिश से मकान ढहने से एक ग्रामीण की मौत हुई। वहीं 3 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें बिलासपुर में 1 किशोर और धमतरी में एक बच्ची व बुजुर्ग शामिल हैं। गंडई और भखारा में डूबे पुलों पर कार बहने की दो अलग-अलग घटनाओं में 7 लोगों की जान बच गई।

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ पर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर खिसक गया है। अगले 12 घंटे में यह सिस्टम और कमजोर होगा। इसके प्रभाव से 27 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और फैलाव में कमी आएगी।

राजधानी रायपुर में रायपुर-दुर्ग को जोड़ने वाले खारुन नदी के पुराने पुल पर करीब एक फीट पानी बहने के बाद दोनों ओर बैरिकेडिंग कर पुलिस तैनात कर दी गई है। यह पुल 2007 के बाद पहली बार इस तरह डूबा है। चंदनीडीह, महादेवघाट, भाठागांव, काठाडीह और दतरेंगा की निचली बस्तियों के घरों में रात 2 बजे पानी घुस गया। लोग छतों पर फंसे रहे, जिन्हें शनिवार सुबह एनडीआरएफ और निगम की टीमों ने नावों से बाहर निकाला। सुरक्षा के मद्देनजर महादेवघाट स्थित विसर्जन कुंड में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा दी गई।

राजनांदगांव में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 1:30 बजे रायपुर व भिलाई से स्विफ्ट कार में कान्हा केसली जा रहे 5 युवा गंडई-धमधा मार्ग पर दनिया के डूबे पुल पर बह गए। कार नदी में गिरते ही पांचों बाहर निकले और 70 मीटर दूर नदी के बीच झाड़ियों को पकड़कर अटके रहे। टीआई शिवशंकर ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि पांच युवक-युवतियों (कमलेश साहू, कुबेर साहू, निहाल सक्सेना, महक कौर और प्रीति रात्रे) बह गए हैं, तो वे मौके पर पहुंचे। सभी की चीखने की आवाज आ रही थी और वे मदद के लिए पुकार रहे थे। चीखें सुनकर वे खुद को रोक नहीं सके। उफनता नाला देख एक पल के लिए घबराए, पर रस्सी के सहारे अंधेरे में तैरकर उन तक पहुंचे। एक युवक कुछ और आगे बह गया था। इन्हें बाहर निकालने के बाद उस तक पहुंचे। अब सभी सुरक्षित हैं, कार बह गई है। ये पता कर रहे हैं कि कार किसके नाम पर है।

रायपुर में पिता का हाथ छूटने से एक मासूम बह गया, जिसका शव बाद में मिला। बलौदाबाजार में कोल्हान नाले पर बने पुल पर डेढ़ फीट पानी था। उसे पार कर रही बस बहने लगी, तब सभी यात्रियों को बचा लिया गया। कांकेर में भानुप्रतापपुर के ग्राम पंचायत इरागांव के आश्रित गांव मरदेल में देर रात 2:30 बजे लाड़ी भरभराकर गिर गई। वहां सो रहे ग्रामीण बुधराम उइके की मलबे में दबने से मौत हो गई। धमतरी में भखारा-जोरातराई मार्ग पर पुलिया के ऊपर तेज बहाव में एक कार बहने लगी, जिसमें सवार 2 युवकों ने खिड़की का कांच तोड़कर बाहर छलांग लगाई और अपनी जान बचाई। महानदी के उफान से घिरे 40 लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित रेस्क्यू किया और 300 से अधिक ग्रामीणों को पंचायत भवनों में शिफ्ट किया है।

बस्तर में इंद्रावती नदी उफान पर होने से चित्रकोट जलप्रपात का रौद्र रूप सामने आया। एनएच-30 पर डिमरापाल के पास पानी आने से यातायात बाधित रहा। गरियाबंद में फिंगेश्वर क्षेत्र में सरगी नाले की पुलिया डूबने से फिंगेश्वर-महासमुंद मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। दुर्ग-बेमेतरा में समोदा नाले की पुलिया डूबने से दुर्ग-बेमेतरा मार्ग बंद रहा। मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। महासमुंद में महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय 18 गांवों में अलर्ट जारी किया गया। बम्हनी गांव में जलभराव में फंसे 2 सुरक्षाकर्मियों को नगर सेना ने निकाला।

मानसून सीजन खत्म होने से 4 दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में कोटे से अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। 1 जून से 30 सितंबर की सामान्य औसत बारिश 1132.3 मिमी है, जबकि 26 सितंबर तक ही 1190.7 मिमी पानी गिर चुका है, जो सामान्य से 5.16% अधिक है। इसमें इस हफ्ते की बारिश का बड़ा योगदान रहा।

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