बीजापुर। विधायक विक्रम मंडावी ने राज्य सरकार पर बस्तर के पवित्र नंदीराज पर्वत को उद्योगपतियों को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है। सात साल पहले आदिवासियों के उग्र आंदोलन के बाद जिस नंदीराज पर्वत पर खनन कार्य रोक दिया गया था, उसी पवित्र पहाड़ पर एक बार फिर लौह अयस्क निकालने और हजारों पेड़ काटने की अनुमति दिए जाने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
मंडावी ने वन विभाग की ओर से पहले चरण में ही 7200 पेड़ काटने की मंजूरी दिए जाने और लौह अयस्क के सैंपल नगरनार भेजे जाने पर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि बस्तर के आदिवासी नंदीराज पहाड़ को केवल पहाड़ नहीं मानते, बल्कि इसे पिटोर रानी माता और नंदीराज देवता का पवित्र निवास स्थान मानते हैं।
विधायक ने वर्ष 2019 के उस महाआंदोलन का जिक्र किया, जिसमें 50 गांवों के हजारों आदिवासियों ने किरंदुल में भारी विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी वैध ग्रामसभा की नई मंजूरी के और पेसा कानून तथा वन अधिकार कानून की धज्जियां उड़ाते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विधायक ने कहा कि बस्तर के संसाधनों को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नंदीराज पर्वत को बचाने का संघर्ष केवल पर्यावरण या जंगल का नहीं, बल्कि बस्तर की मूल पहचान और आस्था का संघर्ष है, और वे इस लड़ाई में हर कदम पर आदिवासी समाज के साथ खड़े हैं।
बस्तर के बैलाडीला स्थित डिपॉजिट-13 यानी नंदीराज पर्वत पर खनन का विवाद जून 2019 में बड़े जनआंदोलन में बदल गया था। संयुक्त उपक्रम के इस लौह अयस्क ब्लॉक के विकास का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने से आदिवासी आक्रोशित थे।
स्थानीय समाज नंदीराज पहाड़ को अपने ईष्ट देव और पिटोर रानी का पावन वास मानता है। आदिवासियों ने आरोप लगाया था कि 2014 में फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव बनाकर पेसा कानून का उल्लंघन किया गया। विरोध में 50 गांवों के हजारों आदिवासियों ने किरंदुल में छह दिनों तक ऐतिहासिक महापड़ाव डाला, जिसके बाद सरकार को खनन प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी थी।



