
छत्तीसगढ़ के सरकारी महकमों में पदोन्नति नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने का खेल चल रहा है। राज्य के कई विभागों में महत्वपूर्ण तकनीकी पदों की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों को सौंपी जा रही है, जिनके पास पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता तक नहीं है। यह केवल सामान्य नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर शासन की ओर से तय विभागीय पदोन्नति समिति की गाइडलाइंस की खुली अवमानना है।
राज्य शासन की ओर से किसी भी तकनीकी पद पर प्रमोशन के लिए पारदर्शी नियम बनाए गए हैं। इसके तहत संबंधित क्षेत्र की विशेषज्ञता, विज्ञान, इंजीनियरिंग या अन्य विशिष्ट डिग्रियों का होना अनिवार्य है। वहीं विभागों में निचले स्तर के गैर-तकनीकी कर्मचारियों को अधिकारी रैंक पर बैठाने से न केवल विभागीय कामकाज की गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता गिर रही है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय कार्यालयों में बैठे शीर्ष अधिकारी और बाबू-यूनियनों की मिलीभगत अपने लोगों को मलाईदार कुर्सियों तक पहुंचा रही है।
प्रदेश में नाप-तौल, फूड सेफ्टी, पीडब्ल्यूडी व वन विभागों में सामने आए मामले इस प्रवृत्ति को उजागर करते हैं। वन विभाग में चपरासी से सीधे डिप्टी रेंजर बनाने का मामला दुर्ग सीसीएफ कार्यालय की मनमानी का बड़ा उदाहरण है। सितंबर 2025 में सामने आए इस मामले में वर्ष 2008 के आसपास भर्ती एक चपरासी को वायरलेस ऑपरेटर और वनरक्षक बनाने के बाद सीधे डिप्टी रेंजर के पद पर प्रमोट कर दिया गया। यह पदोन्नति प्रशिक्षण में प्रथम आने के उस नियम का हवाला देकर दी गई जो काफी पहले ही समाप्त हो चुका था।
नाप-तौल विभाग में नियम-2011 को दरकिनार कर सामान्य क्लर्कों को निरीक्षक बनाने का खेल 2022 से जारी है। इस पद के लिए ‘बीएससी फिजिक्स’ या ‘इंजीनियरिंग’ की डिग्री अनिवार्य है, लेकिन विभाग बिना तकनीकी योग्यता वाले क्लर्कों को प्रमोट करने पर अड़ा है। हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर विभाग ने ‘वन-टाइम रिलैक्सेशन’ के सहारे 22 मार्च को परीक्षा कराई, जिसमें सभी 21 क्लर्क फेल हो गए।
नवा रायपुर स्थित लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग में 2015 से 2021 के बीच तकनीकी योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार कर निचले स्तर के कर्मचारियों को सीधे तकनीकी पद सब-इंजीनियर पर प्रमोट कर दिया गया। सीधी भर्ती वाले योग्य इंजीनियरों की अनदेखी व अवैध प्रमोशन पर डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया था।
खाद्य सुरक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी कर 13 ‘नमूना सहायकों’ को सीधे ‘फूड सेफ्टी ऑफिसर’ के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। FSSAI के नियमों के तहत इस पद के लिए फूड टेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी या केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री या एमबीबीएस अनिवार्य है। पर केवल 12वीं (विज्ञान) पास कर्मचारियों को अधिकारी बना दिया गया।
इन सभी मामलों में नियमों की साफ अवहेलना की गई है, जिससे विभागीय कामकाज की गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। योग्य युवा सड़क पर हैं, जबकि चहेते बिना योग्यता के अफसर बन रहे हैं।



