धमतरी जिले के नगरी अंचल की पारंपरिक सुगंधित धान ‘नगरी दुबराज’ अब खेतों और घरों तक सीमित नहीं रही। जीआई टैग प्राप्त यह विशिष्ट धान अब देश के विभिन्न शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी खुशबू पहुंचा रही है। गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) ने जैविक उत्पादन, सामूहिक प्रयास, मूल्य संवर्धन, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन के माध्यम से इसे नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
नगरी दुबराज अब देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ जापान तक पहुंच चुका है। यह धान नगरी की पहचान, किसानों की विरासत और छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पाद को आगे बढ़ाने का माध्यम बन रहा है। इसे केवल कृषि उपज के रूप में नहीं, बल्कि नगरी क्षेत्र की पीढ़ियों पुरानी कृषि विरासत और स्थानीय पहचान के प्रतीक के रूप में बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसकी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पारंपरिक महत्व इसे अन्य धान किस्मों से अलग पहचान देते हैं। गट्टासिल्ली एफपीओ ने इसी विशेषता को अवसर में बदलते हुए किसानों को संगठित किया और नगरी दुबराज को कच्चे कृषि उत्पाद के बजाय एक विशिष्ट ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम शुरू किया।
एफपीओ के माध्यम से किसानों को उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लेबलिंग और विपणन तक व्यवस्थित व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। महिला किसान अब केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, सामूहिक विपणन, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
गट्टासिल्ली एफपीओ के प्रयासों का दायरा स्थानीय बाजार से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है। नगरी दुबराज देश के विभिन्न शहरों और राज्यों के उपभोक्ताओं तक पहुंच चुका है। हाल ही में इसकी एक खेप जापान तक भेजी गई, जिसने नगरी क्षेत्र के किसानों और महिला नेतृत्व वाले एफपीओ के लिए नई उपलब्धि का मार्ग प्रशस्त किया।
बदलते बाजार और डिजिटल व्यापार की संभावनाओं को देखते हुए गट्टासिल्ली एफपीओ ने नगरी दुबराज को अमेजन, ओएनडीसी और ट्राइब्स इंडिया जैसे डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने की पहल की है। इससे उपभोक्ताओं को घर बैठे नगरी दुबराज खरीदने की सुविधा मिल रही है और उत्पाद की पहुंच स्थानीय बाजार से आगे देश के अलग-अलग हिस्सों तक बढ़ रही है।
नगरी दुबराज के विक्रय पैकेजिंग में शामिल ओम प्रकाश साहू, आरती कश्यप और प्रतिमा यादव ने बताया कि देश के पूरे राज्य में चावल का निर्यात किया जा रहा है। चार माह पहले जिला प्रशासन के सहयोग से जापान में 10 किलो चावल को सैंपल के लिए निर्यात किया गया था। उन्होंने बताया कि हमारी समिति में 1005 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
गट्टासिल्ली फार्मिंग प्रोडक्शन कंपनी लिमिटेड द्वारा अमेजन व अन्य डिजिटल ऑनलाइन माध्यम से चावल का निर्यात हो रहा है। नई पैकेजिंग में यह चावल 140 रुपये प्रति किलो की दर से विक्रय किया जा रहा है।



