पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में प्राध्यापकों की कमी बड़ा मुद्दा बन गई है। विश्वविद्यालय में 111 पदों पर प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, लेकिन तीन वर्ष बाद भी प्रबंधन भर्ती पूरी नहीं कर सका है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ शोध कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
विश्वविद्यालय ने भर्ती को दो चरणों में बांटा था। पहले चरण में 60 पदों के लिए भर्ती निकली थी, जिसमें अभी तक 40 पदों पर ही भर्ती हो चुकी है। वहीं दूसरे चरण में 51 पदों के लिए भर्ती निकाली गई, इसमें अब तक केवल 12 पदों पर भर्ती हुई है। यानी कुल 111 पदों में से 52 पदों पर ही नियुक्ति हो पाई है। विश्वविद्यालय में 40 प्रतिशत से अधिक पद अभी भी प्राध्यापकों के खाली हैं।
विश्वविद्यालय में नियमित प्रोफेसर नहीं होने का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रोफेसर नहीं होने का सबसे ज्यादा नुकसान पीएचडी करने वाले छात्रों को हो रहा है, क्योंकि उन्हें गाइड नहीं मिल पा रहे हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में रुचि नहीं ले रहा है। भर्ती में देरी होने से सवाल भी उठने लगे हैं।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक साथ विज्ञापन निकाला था, तो अलग-अलग नियुक्ति कैसे कर रहा है। जिन अभ्यर्थियों का चयन हो गया है और जिनका अब होगा, दोनों एक दूसरे से सीनियर-जूनियर हो जाएंगे। इससे जूनियर प्रोफेसर को कई समितियों का सदस्य बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया से पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल अवकाश पर चले जाते हैं। ऐसा संयोग कई बार हो चुका है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और लटक जाती है।
विश्वविद्यालय में 111 पदों में 18 पद प्रोफेसर के, 37 पद एसोसिएट प्रोफेसर के और 51 पद असिस्टेंट प्रोफेसर के हैं। जिन विषयों के लिए भर्ती होनी है, उनमें समाज शास्त्र, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति और पुरातत्व, कंप्यूटर साइंस, साहित्य और भाषा, अर्थशास्त्र, फिजिक्स एंड एस्ट्रोफिजिक्स, फिलासिफी एंड योगा, इलेक्ट्रानिक्स एंड फोटोनिक्स, आप्टोइलेक्ट्रानिक्स एंड लेजर टेक्नोलॉजी, बायो-साइंस, एमबीए, फार्मेसी, एंथ्रोपोलाजी, ला, रीजनल स्टडीज, जिओलाजी, सेंटर फार बेसिक साइंस, हिन्दी, लाइब्रेरी इंफारमेशन, केमिस्ट्री, साइकोलाजी और एंवायरमेंटल साइंस शामिल हैं।



