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आदिवासी युवकों को नंगा कर पीटने के आरोपी प्रियांशु केशरी को हाईकोर्ट से झटका, FIR को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

कोर्ट ने पुलिस को जल्द जांच पूरी कर चालान पेश करने का दिया निर्देश, आदतन अपराधी को चेकलिस्ट पर छोड़ने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जशपुर जिले के सन्ना थाना क्षेत्र में 3 जुलाई को दो आदिवासी युवकों को घर में बंधक बनाकर जातिगत गाली-गलौज, निर्वस्त्र कर बेरहमी से पिटाई और करंट लगाने के सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी प्रियांशु केशरी उर्फ रिशु वगैरह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज करते हुए FIR को बरकरार रखा है और पुलिस को नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्यवाही शीघ्र पूरी करने को कहा है।

पीड़ितों का आरोप है कि 3 जुलाई को चोरी के शक में प्रियांशु केशरी और उसके साथियों ने दो आदिवासी युवकों को अपने घर में बंद कर दिया। वहां जातिगत गाली-गलौज करते हुए कपड़े उतारकर बेरहमी से पीटा गया और बिजली का करंट भी लगाया गया। इस मामले में सन्ना थाने में SC/ST एक्ट सहित गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई थी।

आदतन अपराधी है आरोपी, फिर भी चेकलिस्ट पर छोड़ा

सूत्रों के अनुसार आरोपी प्रियांशु केशरी के खिलाफ सन्ना थाने में पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। पंचायत सचिव के साथ पंचायत भवन में मारपीट, मोबाइल लूट, शासकीय कार्य में बाधा, बिजली विभाग के कर्मचारी से कार्यालय में मारपीट, जमीन दलाली और गुंडागर्दी जैसे मामलों में वह आरोपी है। इतने अपराधों के बावजूद पुलिस ने इस जघन्य मामले में भी आदतन अपराधी को गिरफ्तार करने के बजाय केवल चेकलिस्ट देकर छोड़ दिया। घटना को लगभग 3 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश नहीं किया है। हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद अब पुलिस पर चालान पेश करने का दबाव बढ़ गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि SC/ST एक्ट के मामले में चेकलिस्ट पर छोड़ना और 90 दिन तक चालान न पेश करना गंभीर लापरवाही है। अब इस मामले में जांच अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीड़ित परिवार ने जल्द न्याय की उम्मीद जताई है।

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