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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के घोषणा के बावजूद अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा रणजीता स्टेडियम।

जशपुरनगर -: जिला मुख्यालय में स्थित रणजीता स्टेडियम अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा स्टेडियम के विकास और उन्नयन की घोषणा किए जाने के बावजूद, अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्य नजर नहीं आ रहा है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उम्मीद जगी थी कि स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। लेकिन समय बीतने के साथ ये उम्मीदें धीरे-धीरे निराशा में बदलती जा रही हैं।

रणजीता स्टेडियम में वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है स्टेडियम की मरम्मत कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है दर्शकों के लिए गैलरी का निर्माण नहीं हुआ पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था नहीं है, जिससे शाम के समय खेल गतिविधियाँ प्रभावित होती हैंमैदान में रेतीला है, जिससे खिलाड़ी सही तरीके से अभ्यास नहीं कर पा रहे वहीं स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें खराब मैदान में अभ्यास करना पड़ रहा है, जिससे उनके प्रदर्शन और भविष्य पर असर पड़ रहा है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने को मजबूर हैं।

यह समस्या कोई नई नहीं है, वर्षों से स्टेडियम के विकास को लेकर घोषणाएँ होती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यवाही नगण्य रही है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल भी उठ रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्टेडियम का नवीनीकरण कार्य शुरू किया जाए एवं खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएं खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्थायी योजना बनाई जाए ।

इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

रणजीता स्टेडियम, जो कभी खेल प्रतिभाओं का केंद्र हुआ करता था, आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्टेडियम केवल एक उपेक्षित ढांचा बनकर रह जाएगा।

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