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आयुष्मान योजना में बड़ा घोटाला: निजी अस्पताल रोज कर रहे 4 करोड़ का क्लेम, डमी मरीज भर्ती और कमीशनखोरी का खेल

छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों द्वारा प्रतिदिन लगभग 1,600 से 1,700 दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनकी राशि रोज 4 करोड़ रुपए से अधिक बैठती है। डीबी स्टार की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना प्राइवेट अस्पतालों में मुनाफाखोरी करने वाले माफिया की भेंट चढ़ गई है। योजना में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें आती हैं। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों को नोटिस भी जारी करता है, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। यही वजह है कि यह गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा है।

पड़ताल के अनुसार, अगर विभाग आयुष्मान कार्ड से भर्ती मरीजों, बीजू कार्ड से भर्ती ओडिशा के मरीजों और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों से आए मरीजों को कॉल करके क्रॉस चेक करे, तो गड़बड़ी आसानी से पकड़ी जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं होता। हर साल लगभग 25-30 अस्पतालों को आयुष्मान के तहत नोटिस जारी किया जाता है, लेकिन मरीजों से पूछताछ किए बिना ही मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। जिले में तैनात अफसरों की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पड़ताल में पता चला कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 130 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। पीएम जन आरोग्य योजना के लिए राज्य सरकार को अब तक 505 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। वर्तमान में निजी अस्पतालों से प्रतिदिन लगभग 1,600 से 1,700 दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनकी राशि रोज 4 करोड़ रुपए से अधिक बैठती है।

20 जुलाई 2024 को आयुष्मान योजना में नियमों की अनदेखी पर 48 अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। मरीजों से अतिरिक्त नगद राशि लेने, अनावश्यक भर्ती करने और नियम विरुद्ध गर्भाशय ऑपरेशन की शिकायतों पर 11 अस्पतालों पर लाखों रुपए का जुर्माना लगाया गया था, जबकि एक अस्पताल का पंजीयन निरस्त किया गया था। शेष 33 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। इसके बावजूद डमी मरीज भर्ती करने और फर्जीवाड़े का खेल बदस्तूर जारी रहा।

रायपुर जिले के कई अस्पतालों ने इस साल औसतन एक से 6 करोड़ रुपए तक का आयुष्मान क्लेम किया है। इनमें प्रमुख रूप से गुडविल, हेरिटेज, ममता, संजीवनी, रिम्स, एमएमआर, रामकृष्ण, बालगोपाल, कैरियंट कैंसर सेंटर, रावतपुरा सरकार, रिम्स और ओम अस्पताल सहित 21 अस्पतालों के नाम दर्ज हैं। 17 अस्पतालों को सिर्फ एक बार नोटिस मिला। बीसीआर हॉस्पिटल, एचएम हॉस्पिटल, वैदेही, नवकार, श्रीनिवास, रामकृष्ण, श्री शंकरा, ब्लू बर्ड, वात्सल्य, अरविंदो, यशवंत, एम्स और पेटल्स हॉस्पिटल को एकबार नोटिस जारी हुआ। जबकि बालगोपाल हॉस्पिटल को दो बार नोटिस दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।

आयुष्मान कार्ड से इलाज लापरवाही के मामले में शिकायत के आधार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ संजीव कुमार झा ने कहा कि नोटिस देने के बाद जिन अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं हुई है, इसे भी चेक करवा लेते हैं।

डीबी स्टार की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान योजना में कमीशनखोरी करने वाले अस्पतालों पर बड़ा एक्शन लिया है। राज्य स्तरीय जांच समिति की अनुशंसा पर ‘मेडलाइफ सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल’ की नर्सिंग होम एक्ट के तहत मान्यता निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अन्य हॉस्पिटल को आयुष्मान योजना से आगामी आदेश तक डी-एम्पैनल (बाहर) कर दिया गया है। जांच में मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूलने की भी पुष्टि हुई है। जांच टीम के साथ मौके पर मौजूद डीबी स्टार की टीम ने ग्राउंड जीरो से यह रिपोर्ट तैयार की है।

जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में ऐसे मरीजों के भर्ती होने की जानकारी सामने आई, जिनका रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध ही नहीं करा पाया। कुछ मरीज बाकायदा ICU में भर्ती बताए गए, लेकिन उनकी भर्ती से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड नदारद मिले। जांच टीम ने जब मरीजों की फाइलें मांगीं, तो कई जगह अस्पताल स्टाफ को फाइल लाने में 10 से 15 मिनट लग गए। नियमों के मुताबिक, मरीज के भर्ती रहने के दौरान उसकी मेडिकल फाइल बेड के पास ही मौजूद होनी चाहिए। विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फिलहाल दो अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। शिकायत वाले अन्य अस्पतालों की भी जांच की जा रही है। अतिरिक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ इन्द्रजीत बर्मन ने यह जानकारी दी।

जांच टीम ने जब रिकॉर्ड खंगाले तो वरदान अस्पताल का बड़ा खेल सामने आया। खबर छपने के दिन यानी 28 सितंबर की सुबह कुछ ही समय के अंतराल में अस्पताल से 19 मरीजों को एक साथ डिस्चार्ज कर दिया गया। इनमें एक मरीज महासमुंद का और बाकी 18 मरीज ओडिशा के बताए गए। वहीं, 30 सितंबर को जांच के दौरान अस्पताल में करीब 20 मरीज भर्ती थे, जिनमें आयुष्मान योजना के तहत सिर्फ 7 मरीज मिले। जांच में यह भी सामने आया कि हाथ-पैर दर्द जैसी सामान्य शिकायत लेकर आए मरीजों को भी भर्ती कर लिया गया था, जबकि वे भर्ती किए जाने की स्थिति में ही नहीं थे।

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