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करोड़ों की अनियमितता के बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रभारी डीईओ का सिर्फ तबादला; लोगों में नाराजगी

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से जुड़े मामले में अब कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय जांच में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई करने की बजाए सिर्फ तबादला कर दिया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और कुछ लोगों ने मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

गौरतलब है कि 28 सितंबर को स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार मनीराम यादव को बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पद से हटाकर सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है।

वहीं शासकीय हाई स्कूल कोराचा, विकासखंड मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के प्राचार्य नरेंद्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

जांच में अनियमितता की हुई थी पुष्टि- मनीराम यादव के कार्यकाल में शिक्षा विभाग के विभिन्न मदों में वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आने और नईदुनिया के समाचार प्रकाशन के बाद संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की ओर से जांच कराई गई थी। जांच अपर कलेक्टर और कोष अधिकारी स्तर के द्वारा की गई।

जांच में डीएफ मद, सफाई सामग्री, अध्ययन सामग्री, साइकिल वितरण और फर्नीचर खरीदी सहित अलग-अलग मदों में वित्तीय नियमों की अनदेखी और राशि के उपयोग से संबंधित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। 11 अगस्त 2026 को जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने के बाद इसे शासन को भेजा गया। उपलब्ध रिपोर्ट और मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार जांच में करीब 4.53 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया है।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग ने मनीराम यादव को बलरामपुर से हटा दिया है। हालांकि, विभागीय आदेश में उन्हें निलंबित किए जाने का उल्लेख नहीं है। उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के पद से हटाकर प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है।

यही बिंदु अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जांच में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है, तो केवल तबादला किए जाने से कार्रवाई पूरी कैसे मानी जा सकती है। लोगों का कहना है कि मामले में शासन स्तर पर स्पष्ट और संतोषजनक कार्रवाई होनी चाहिए।

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