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रायपुर नगर निगम एमआईसी बैठक में अफसरों पर नाराजगी, 4 घंटे देर से शुरू हुई बैठक; 39 प्रस्ताव रखे गए

रायपुर नगर निगम में बुधवार को मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर हुए विवाद के कारण चार घंटे देर से शुरू हुई। दोपहर एक बजे प्रस्तावित बैठक शाम पांच बजे शुरू हो सकी। भाटागांव सब्जी बाजार में व्यापारियों को हटाने की कार्रवाई और यूजर चार्ज पर ब्याज वसूली किए जाने को लेकर महापौर और एमआईसी सदस्यों ने जिम्मेदार अफसरों पर नाराजगी जताई। सदस्यों ने जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की, जिसके चलते बैठक शुरू नहीं हो सकी। इस दौरान निगम अधिकारियों और एमआईसी सदस्यों के बीच तीखी बहस और गहमागहमी हुई। संबंधित अफसर के माफी मांगने के बाद मामला शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही शुरू की गई।

नगर निगम की बुधवार को हुई मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में शहर के विकास और जनसुविधाओं से जुड़े 39 प्रस्ताव रखे गए। इनमें संपत्तिकर बकायादारों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस), अवैध नल कनेक्शनों को नियमित करने और पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के प्रस्ताव प्रमुख हैं। इसके अलावा दिव्यांग पार्क, एम्स के पास विश्राम गृह, स्ट्रीट फूड हब, मोवा गारमेंट फैक्ट्री और शीतला तालाब के जीर्णोद्धार जैसे प्रोजेक्ट भी एजेंडे में रहे।

महापौर मीनल चौबे ने अफसरों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी चार्ज सेवा के बदले लिया जाता है, इस पर किस अधिनियम के तहत ब्याज लगाया गया? आयोजन के लिए शुल्क लेने का फैसला किस अधिकारी ने लिया। इस तरह की मनमानी अफसर कर रहे हैं और इससे राज्य सरकार और नगर निगम दोनों की छवि धूमिल हो रही है। किसी भी प्रकार की अफसरशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अफसरों के बीच खींचतान पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमआईसी में भाठागांव सब्जी बाजार के व्यवस्थापन, संपत्ति कर, वार्डों के विकास कार्य, सफाई, अवैध निर्माण-बेजा कब्जा और जलापूर्ति जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इसके बजाय महापौर परिषद और अधिकारियों के बीच खींचतान सामने आई। जब एमआईसी की बैठक ही समय पर नहीं होगी तो वार्डों के विकास कार्य समय पर कैसे होंगे?

बैठक से पहले चार मुद्दों पर एमआईसी सदस्य पहले से नाराज थे और उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। एमआईसी की बैठक बुधवार दोपहर 1 बजे शुरू होनी थी। तय समय में महापौर सहित सभी एमआईसी मेंबर, आयुक्त और निगम के सभी अधिकारी नगर निगम के सभागार में पहुंच चुके थे, लेकिन विवाद के कारण कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी।

पहला मुद्दा संपत्तियों का सेल्फ असेसमेंट था। दो महीने पहले नगर निगम से संपत्तियों के सेल्फ असेसमेंट का एक आदेश जारी हुआ था। जारी आदेश में कहा गया था कि नागरिक 24 घंटे के भीतर अपनी संपत्तियों का सेल्फ असेसमेंट करें और उसके अनुसार संपत्तिकर जमा करें। दूसरा मुद्दा यूजर चार्ज पर ब्याज का था। नगर निगम ने सालों से यूजर चार्ज नहीं देने वालों से ब्याज वसूलना शुरू किया, वो भी 18 प्रतिशत अधिभार के साथ, जबकि अधिभार केवल संपत्तिकर पर लगता है।

तीसरा मुद्दा भाठागांव सब्जी बाजार आवंटन विवाद था, जो सबसे बड़ा मुद्दा बना। महापौर ने अधिकारियों से कहा था कि व्यापारियों की आपत्ति को दूर करने के लिए कार्रवाई की जाए। चौथा मुद्दा तिरंगा शक्ति फेस्ट में शुल्क वसूली का आदेश था। नगर निगम की ओर से 14 अगस्त को तिरंगा शक्ति फेस्ट का आयोजन किया गया था। इसके लिए पोस्टर जारी किया गया, जिसमें 249 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक शुल्क लिया जा रहा था। हालांकि पोस्टर को लेकर हुए विवाद के बाद शुल्क लेने का आदेश वापस ले लिया गया।

एमआईसी की बैठक के एजेंडे में कई बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल रहे। सिद्धार्थ चौक, टिकरापारा में 9.99 करोड़ रुपए से इनक्लूसिव पार्क प्रस्तावित है। इसमें बाधारहित आवागमन, थेरेपी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं रहेंगी। एम्स के पास विश्राम गृह में मरीजों के परिजनों के लिए रियायती दर पर ठहरने की सुविधा होगी। संचालन EOI से चयनित गैर-लाभकारी संस्था करेगी।

महादेवघाट विसर्जन कुंड क्षेत्र में 1.96 करोड़ रुपए से स्ट्रीट फूड हब प्रस्तावित है। मोवा की गारमेंट फैक्ट्री को पीपीपी मोड पर 30 साल की लीज पर देने का प्रस्ताव है। निगम को एक करोड़ रुपए सालाना लीज रेंट मिलेगा और करीब 500 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। अमृत मिशन 2.0 से अवंति विहार के शीतला तालाब का 4.50 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है।

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