
यूपीआई से 2000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाया जाएगा। दो हजार रुपए से अधिक का पेमेंट करने पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगेगा। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 95 प्रतिशत लोग यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, यूपीआई से पेमेंट करने में छत्तीसगढ़ कई बड़े राज्यों से आगे हो गया है।
छत्तीसगढ़ की जनसंख्या तीन करोड़ से ज्यादा है। प्रदेश के बैंकों में करीब 2 करोड़ खाते हैं। इनमें 95 प्रतिशत यानी 1.90 करोड़ लोग यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं। इस तरह यूपीआई धारक चार्ज के दायरे में आ सकते हैं।
एसएलबीसी रिपोर्ट मार्च 2026 के अनुसार केवल रायपुर में ही 83.53 लाख लोग यूपीआई का उपयोग करते थे। लेकिन जून 2026 की रिपोर्ट में यह संख्या बढ़कर 84.78 लाख हो गई। अभी सितंबर 2026 की रिपोर्ट नहीं आई है। इसलिए यह संख्या 90 लाख के पार हो जाएगी। दुर्ग में यह संख्या 86.28 लाख और बिलासपुर में 70.57 लाख से ज्यादा है। रायगढ़ में 57.88 लाख, जांजगीर-चांपा में 46.99 लाख और कोरबा में 42.06 लाख कनेक्शन हैं। बस्तर, कांकेर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों में भी यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
अभी महाराष्ट्र में 69.7 प्रतिशत, केरल में 73.3 प्रतिशत और तेलंगाना में 75.5 प्रतिशत लोग यूपीआई का उपयोग करते हैं, जो राष्ट्रीय औसत 81.40 प्रतिशत से कम है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य ऐसा है जहां नेशनल एवरेज से कहीं ज्यादा 95 प्रतिशत लोग यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ ही नहीं, देशभर में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से ट्रांजैक्शनों की संख्या सालाना आधार पर 23.66 अरब हो गई। इन ट्रांजेक्शनों से 29.88 लाख करोड़ का लेन-देन किया गया है। जुलाई में हर दिन औसतन 76.3 करोड़ (763 मिलियन) यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं। इसमें औसतन 96383 करोड़ का लेन-देन हुआ है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया है कि यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से ज्यादा देशों में उपलब्ध है।
एसएलबीसी की रिपोर्ट जून 2026 के अनुसार छत्तीसगढ़ में अभी 3525 शाखाएं और 3620 एटीएम काम कर रहे हैं। निजी और शासकीय बैंकों को वर्गीकृत करने की वजह से शाखाओं की संख्या मार्च 2026 की 3596 की तुलना में जून 2026 में 3525 हुई। राज्य में बैंक शाखाओं को बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि वर्गीकृत होने की वजह से उनकी परिभाषा बदल रही है। अब बैंक की ब्रांच उसी को माना जाता है जहां बैंकिंग संबंधित सभी तरह के काम होते हों। केवल काउंटर खोलने या थोड़े बहुत काम करने को शाखा नहीं माना जा रहा है।
सभी बैंकों की लगातार कोशिश है कि लोगों की सुविधा के लिए बैंक शाखाओं की संख्या बढ़ाई जाए। यही वजह है कि 2025-26 में 102 नई ब्रांच खोली गई हैं। इस वित्तीय साल के अंत तक एसबीआई के साथ कई बैंक खासतौर पर ग्रामीण अंचलों में नई शाखा खोल रहे हैं। इसी कड़ी में 26 सितंबर को जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील के पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक की नई शाखा शुरू की गई है।
एसएलबीसी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बैंक शाखाओं और एटीएम की स्थिति इस प्रकार रही — दिसंबर 2025 में 3552 शाखाएं और 3616 एटीएम, मार्च 2026 में 3596 शाखाएं और 3546 एटीएम तथा जून 2026 में 3525 शाखाएं और 3620 एटीएम।



